US-Iran War: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद अब ईरान के सुर बदल गए हैं. ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत भले ही किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन कूटनीति (डिप्लोमेसी) अभी खत्म नहीं हुई है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ी, तो ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जैसे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं.
PAK की मध्यस्थता से संदेशों के आदान-प्रदान
वरिष्ठ ईरानी राजनयिक इस्माइल बगाई हमानेह ने कहा कि हाल की वार्ता पिछले एक साल की सबसे लंबी बातचीत थी. इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत करीब 24–25 घंटे तक चली. यह बातचीत सीधे नहीं, बल्कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए संदेशों के आदान-प्रदान के रूप में हुई. कुछ अहम मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच समझ बनी, लेकिन बड़े मुद्दों पर मतभेद बने रहे. इसी वजह से कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया.
कभी खत्म नहीं होती डिप्लोमेसी
ईरान ने साफ कहा कि डिप्लोमेसी कभी खत्म नहीं होती. कूटनीति हमेशा राष्ट्रीय हितों की रक्षा का माध्यम है चाहे युद्ध हो या शांति, बातचीत जारी रहनी चाहिए. इसलिए भविष्य में भी वार्ता की संभावना बनी हुई है. बकाएई ने बताया कि यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब हाल ही में युद्ध और तनाव रहा. युद्धविराम के बाद भी दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी है. माहौल संदेह और अविश्वास से भरा हुआ है.
परमाणु कार्यक्रम से समझौता और मुश्किल
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और जायोनिस्ट शासन (इजराइल) ने ईरान पर सैन्य हमला किया. पिछले 9 महीनों में यह दूसरी बार हुआ. इस बार बातचीत में नए मुद्दे Strait of Hormuz का मुद्दा, क्षेत्रीय सुरक्षा हालात, ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी जुड़े जिनकी वजह से समझौता और मुश्किल हो गया.
पाकिस्तान ने की शानदार मेजबानी और मध्यस्थता
ईरान ने पाकिस्तान की तारीफ करते हुए कहा कि Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir ने अहम भूमिका निभाई. पाकिस्तान ने शानदार मेजबानी और मध्यस्थता की. हालांकि बातचीत इस बार भी सफल नहीं रही, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि दरवाजे बंद नहीं हुए हैं. तनाव, अविश्वास और बड़े मुद्दों के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे, जो भविष्य में किसी बड़े समझौते का रास्ता खोल सकते हैं.
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