‘जो अपनों की ही मदद न करे वो सच्चा मुसलमान नहीं…’, जंग में घिरे ईरान ने मुस्लिम देशों को दी इस्लाम की दुहाई

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran US war: इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते से भी ज्‍यादा समय से जंग जारी है. दोनों पक्षों में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. इसी बीच ईरान की सुरक्षा परिषद के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने दुनिया भर के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों को एक विस्तृत खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्‍होंने इस्‍लामिक देशों को इस्‍लाम की दुहाई दी है.

अली लारीजानी ने कहा है कि अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच ईरान जिस समर्थन की उम्मीद मुस्लिम देशों से कर रहा था, वह नहीं मिला. लारीजानी ने इस्लामी देशों से पूछा है कि वे किस पक्ष में खड़े होना चाहते हैं.

ज्यादातर इस्लामी देशों ने सिर्फ बयान दिए

लारीजानी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद अधिकांश मुस्लिम देशों ने सिर्फ राजनीतिक बयान दिए, लेकिन वास्तव में ईरान के साथ खड़े नहीं हुए. उनके अनुसार, इस हमले में ईरान के कई नागरिकों, सैन्य कमांडरों और इस्लामी क्रांति के एक बड़े नेता की मौत हुई. इसके बावजूद ईरानी जनता ने ‘दृढ़ इच्छाशक्ति’ के साथ इस हमले का जवाब दिया है, जबकि हमलावर इस रणनीतिक संकट से निकलने का रास्ता नहीं खोज पा रहे.

अमेरिका‑इजरायल को बड़ा और छोटा शैतानबताया

पत्र में उन्होंने अमेरिका और इज़रायल को ‘बड़ा शैतान’ और ‘छोटा शैतान’ कहते हुए दावा किया कि ईरान इन दोनों के खिलाफ प्रतिरोध के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. इसके साथ ही उन्‍होंने ये भी आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम देशों का रवैया पैगंबर मुहम्मद की उन शिक्षाओं के खिलाफ है, जिनमें कहा गया है कि किसी मुसलमान की पुकार सुनकर भी यदि कोई मदद न करे, तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है.

क्या ईरान चुप बैठा रहे?’

लारीजानी ने कई देशों द्वारा यह कहे जाने पर कि ईरान ने उनके देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, को लेकर सवाल उठाया कि ‘क्या ईरान से यह उम्मीद की जाती है कि वह हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहे, जबकि आपके देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों का इस्तेमाल हम पर हमले के लिए किया जा रहा है?’ उनका कहना है कि यह बहाना है और मौजूदा स्थिति में संघर्ष एक तरफ अमेरिका‑इजरायल और दूसरी तरफ ईरान व प्रतिरोध की ताकतों के बीच है.

अमेरिका वफादार नहीं, इजरायल दुश्मन

अली लारीजानी ने पत्र में इस्लामी देशों से आग्रह किया कि वे भविष्य के बारे में सोचें और दावा किया कि अमेरिका आपका वफादार नहीं है और इजरायल आपका दुश्मन है. ईरान किसी पर प्रभुत्व स्थापित नहीं करना चाहता, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और स्वतंत्रता चाहता है. इसके साथ ही उनहोंने पत्र के अंत में उन्होंने पूरी मुस्लिम दुनिया से एकता की अपील करते हुए कहा कि यदि ‘उम्मा’ एकजुट हो जाए, तो सभी देशों के लिए सुरक्षा, प्रगति और स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकती है.

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