Iran US War: अमेरिका ईरान के बीच पिछले 6 महीनों से जंग जारी हैं, जो कई बार खत्म होते-होते दोबारा शुरू हो जाती है. इन सबके बीच, अचानक ईरान की तरफ से जंग को खत्म करने का संकेत मिला है. दरअसल, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने ऐलान किया है कि ‘जंग खत्म करने का सही वक्त आ गया है’.
बता दें कि पेजेशकियान का ये बयान वॉर में चीन की एंट्री के बाद आया है, जिसमें दोनों देशों को बातचीत से हल निकालने की हिदायत दी गई थी. पेजेशकियान का दावा है कि इस समय ईरान, वाशिंगटन के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत, हावी और सम्मानजनक स्थिति में खड़ा है, इसलिए इसी मोड़ पर युद्ध विराम करना सबसे अक्लमंदी का कदम होगा.
‘हम ताकत की स्थिति में हैं, दुनिया मान रही ईरान की जीत’
ईरान में एक इवेंट के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ‘ये बेहतर होगा कि हम इस जंग को इसी मोड़ पर रोक दें, क्योंकि आज हम पूरी तरह ताकत और सम्मान की स्थिति में हैं. पूरी दुनिया हमारी जीत का लोहा मान रही है. सब देख रहे हैं कि कैसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए हमारे स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया. जिसके चलते आज पूरी दुनिया में अमेरिका के खिलाफ भारी गुस्सा और नफरत पैदा हो चुकी है’.
इसके साथ ही पेजेशकियान ने जून में अमेरिका के साथ हुए उस विवादित MoU को भी खुलकर डिफेंड किया, जिसको लेकर ईरान के कट्टरपंथी सांसद अपनी ही सरकार पर भड़के हुए थे. उनका आरोप था कि सरकार ने अमेरिका के आगे घुटने टेक दिए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए अमेरिका को बड़ी रियायतें दे डाली हैं.
इस पर पलटवार करते हुए राष्ट्रपति ने साफ कहा कि इस समझौते में ऐसा एक भी शब्द या क्लॉज नहीं है जो ईरान के सरेंडर का संकेत देता हो. इसमें जितनी भी शर्तें और पाबंदियां हैं, वो सब दूसरे पक्ष यानी अमेरिका पर लागू होती हैं. बता दें कि कुछ ही हफ्ते पहले ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी कुछ मतभेदों के बावजूद इस डील को अपनी मंजूरी दे दी थी.
ईरान ने अमेरिका पर लगाए आरोप
जब अमेरिका को समझ आ गया कि सीधे मिलिट्री एक्शन से ईरान को झुकाना नामुमकिन है, तो ट्रंप ने रणनीति बदलते हुए आर्थिक मोर्चे पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. अमेरिका के इस रुख पर भड़कते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे सीधे तौर पर ‘आर्थिक आतंकवाद’ और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ करार दिया है. तेहरान का कहना है कि ऐसे गैर-कानूनी प्रतिबंध थोपने वाले अमेरिकी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय अदालतों में सजा के हकदार हैं.
अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’ और गिरती साख
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में दावा किया था कि युद्ध के छह महीने पूरे होने पर वाशिंगटन अब एक ऐसा आर्थिक अभियान शुरू करने जा रहा है, जो ईरानी हुकूमत को अंदर से तबाह कर देगा. अमेरिकी वित्त मंत्री ने इस मास्टरप्लान को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ का नाम दिया है, जिसका ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर जमकर मजाक उड़ाया. उन्होंने लिखा कि तथाकथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ कुछ और नहीं, बल्कि अमेरिका के अपने घरेलू आर्थिक संकट, बढ़ते कर्ज और आसमान छूती ब्याज दरों से दुनिया का ध्यान भटकाने का एक घटिया पैंतरा मात्र है.
चीन ने अमेरिका को दिया बड़ा झटका!
इन सबके बीच सबसे बड़ा ट्विस्ट उस वक्त आया जब चीन ने मैदान में एंट्री की. दरअसल, अमेरिका लगातार बीजिंग पर दबाव बना रहा था कि वो ईरान को अलग-थलग करने और उसकी अर्थव्यवस्था को तोड़ने में वाशिंगटन का साथ दे. ऐसे में चीन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को सीधे मुंह खारिज करते हुए वाशिंगटन को करारा झटका दिया है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ एकतरफा प्रतिबंधों और दादागिरी से पश्चिम एशिया का मुद्दा कभी हल नहीं हो सकता. चीन ने सभी पक्षों को संयम बरतने और कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की सलाह दी है.

