Tehran: युद्ध के भीषण होते ही ईरान के नेतृत्व में दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं. देश की मौजूदा रणनीति और जवाबी कार्रवाई को लेकर विवाद शुरू हो गया है. ईरानी राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों पर हमले न करने और माफी की पेशकश की, जिससे देश में सियासी हलचल मच गई. राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर अपनी बात दोहराई लेकिन माफी का हिस्सा हटा दिया. इससे देश के हार्डलाइनर्स और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को गुस्सा आया.
माफी के प्रस्ताव की आलोचना
ईरान के हार्डलाइनर धर्मगुरु और सांसद हामिद रसाई ने X पर कहा कि पेजेश्कियन की बात अस्वीकृत और कमजोर थी. पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर ने भी उनके माफी के प्रस्ताव की आलोचना की. सूत्रों के मुताबिक ईरान के शीर्ष नेतृत्व में पहले से ही हार्डलाइनर्स और प्रगमेटिक नेताओं के बीच मतभेद थे. अब राष्ट्रपति पेजेश्कियन के बयान के बाद यह मतभेद खुलकर सामने आए.
पेजेश्कियन के बयान से कई वरिष्ठ कमांडर नाराज
एक हार्डलाइनर ने कहा कि पेजेश्कियन के बयान ने कई वरिष्ठ कमांडरों को नाराज किया. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान में लंबे समय से मतभेद दबाए गए थे लेकिन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद ये अब खुलकर सामने आ रहे हैं. कूटनीति और युद्ध दोनों पर दबाव बढ़ने के बीच ईरान की आंतरिक राजनीति पर यह स्थिति गंभीर प्रभाव डाल सकती है. ईरान में इस समय दो धड़े दिखाई दे रहे हैं.
हमलों के बीच ईरानी नेतृत्व में दरारें
एक हार्डलाइनर जो कड़ा प्रतिशोध चाहता है. दूसरा प्रगमेटिक जो कूटनीतिक समाधान की उम्मीद रखता है. युद्ध और विदेशी हमलों के बीच ईरानी नेतृत्व की ये दरारें देश के भविष्य और मिडिल ईस्ट में स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं. युद्ध के बीच ईरान में आंतरिक विवाद और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बढ़ती भूमिका युद्ध को और जटिल बना रही है.
ईरानी मिसाइलों में 90 फीसदी गिरावट
महत्वपूर्ण ये भी है कि युद्ध में ईरान कब तक टिक पाता है क्योंकि अमेरिकी CENTCOM के हेड के मुताबिक ईरानी मिसाइलों की संख्या में 90 फीसदी गिरावट हुई है जबकि 83 फीसदी ड्रोन हमले भी कम हुए हैं. हालांकि अब भी उनके पास हथियार तो हैं ही.
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