मध्य पूर्व के देश इराक में लंबे राजनीतिक गतिरोध के बाद आखिरकार नए प्रधानमंत्री का चुनाव हो गया है। अली फालिह कादिम अल-जैदी ने आधिकारिक तौर पर इराक के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। इराकी संसद ने उनकी सरकार को मंजूरी दी, जिसके बाद उन्होंने पदभार संभाला। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अली अल-जैदी को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत और इराक के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और दोनों देश मिलकर सहयोग को और मजबूत करेंगे।

कौन हैं अली अल-जैदी?
अली अल-जैदी को इराक की राजनीति में एक नए चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। वे पहले बिजनेस और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे अल-जनूब इस्लामिक बैंक के चेयरमैन भी रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि इराक में महीनों से चल रहे राजनीतिक संकट और सत्ता संघर्ष के बाद उन्हें समझौता उम्मीदवार के रूप में चुना गया। 40 वर्षीय अल-जैदी को इराक का सबसे युवा प्रधानमंत्री भी माना जा रहा है।
संसद में मिली मंजूरी
इराकी संसद ने अली अल-जैदी की सरकार और कैबिनेट को मंजूरी दे दी। हालांकि अभी कुछ मंत्रालयों पर सहमति नहीं बन पाई है, जिसके कारण आंशिक कैबिनेट के साथ सरकार ने काम शुरू किया है। शपथ ग्रहण के बाद अल-जैदी ने देश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और हथियारों पर सरकारी नियंत्रण सुनिश्चित करने की बात कही।
भारत-इराक संबंधों पर क्या असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रधानमंत्री के आने के बाद भारत और इराक के बीच व्यापार, ऊर्जा और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिल सकती है। भारत इराक से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पीएम मोदी के बधाई संदेश को भी दोनों देशों के मजबूत रिश्तों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
इराक के नए प्रधानमंत्री बनने के बाद सोशल मीडिया पर भी अली अल-जैदी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।