Ireland: आयरलैंड में एक बार फिर धार्मिक वैचारिक हिंसा के मामले ने तूल पकड लिया है, जिसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 24 वर्षीय अब्दुल्ला खान ने आगजनी की और पुलिस अधिकारी पर चाकू से हमला कर दिया. अब्दुल्ला ने पुलिस अधिकारी पर हमला करने व आगजनी के साथ ही आतंक से जुड़े अपराधों में अदालत में अपना दोष भी स्वीकार कर लिया है.
हमले के दौरान आरोपी अल्लाहु अकबर के लगा रहा था नारे
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक हमले के दौरान आरोपी अल्लाहु अकबर के नारे लगा रहा था. इस घटना में आयरिश पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुआ, हालांकि वह बच गया. घटना का वीडियो कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दुनियाभर में देखा जाने लगा. इससे पहले भी आयरलैंड में इसी साल जनवरी में धार्मिक वैचारिक हिंसा का मामले आया था.
धर्म पर आपत्ति जताते हुए बस में चढ़ने से इनकार
जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसमें एक यात्री ने कथित तौर पर चालक के धर्म पर आपत्ति जताते हुए बस में चढ़ने से इनकार कर दिया था. जिसने धार्मिक सहिष्णुता और समानता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी. आयरलैंड की पुलिस, स्थानीय प्रशासन या संबंधित ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की. न ही किसी आधिकारिक बयान में यह पुष्टि हुई कि यात्री की आपत्ति वास्तव में चालक के धर्म को लेकर थी.
धर्म के आधार पर भेदभाव की चुनौती
इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि आधुनिक और लोकतांत्रिक समाजों में भी धर्म के आधार पर भेदभाव की चुनौती बनी हुई है. मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सार्वजनिक सेवाओं में काम करने वाले हर व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है चाहे उनका धर्म, जाति या पृष्ठभूमि कुछ भी हो. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं पर जागरूकता फैलाना जरूरी है ताकि समाज में सम्मान, समावेशन और कानून के तहत समानता के मूल्यों को मजबूत किया जा सके.
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