भारत ने ईरान के युद्धपोत IRIS लावन को क्यों दी शरण, विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई वजह

IRIS Lavan : विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने भारत के उस फैसले का बचाव किया है, जिसमें ईरान के युद्धपोत IRIS लावन को कोच्चि में डॉक करने की इजाजत दी गई है. बता दें कि रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह से मानवीय कर्तव्य बताया. साथ ही ये भी कहा कि यह निर्णय बिल्कुल सही था. इसके साथ ही ईरानी जहाज भारत के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और MILAN 2026 में हिस्सा लेने आए थे, लेकिन वर्तमान में हालात बिगड़ गए. अमेरिकी नौसेना ने इस बीच एक ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को श्रीलंका के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जल में टॉरपीडो से डुबो दिया, जिसमें कई नाविक मारे गए थे.

तकनीकी खराबी की वजह से भारत से मांगी मदद

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार श्रीलंका के मैरिटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी कि MRCC ने जहाज के डिस्ट्रेस सिग्नल पर कार्रवाई की. साथ ही भारतीय नौसेना ने भी राहत एवं बचाव कार्य में मदद की जिससे कई नाविकों की जान बच गई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, IRIS लावन, जो फ्लीट रिव्यू में शामिल था, ने तकनीकी खराबी की वजह से भारत से मदद मांगी. ऐसे में उन्‍होंने बताया कि ईरान ने 28 फरवरी को भारत से अनुरोध किया कि इस जहाज को कोच्चि में शरण दी जाए और भारत ने 1 मार्च को इजाजत दे दी. इसके बाद जहाज कुछ दिनों बाद कोच्चि पहुंचा और 4 मार्च को डॉक हो गया.

हमले सही काम किया- जयशंकर

बता दें कि उन्‍होंने रायसीना डायलॉग में ये भी कहा कि ‘वे फ्लीट रिव्यू के लिए आ रहे थे, लेकिन घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए. उन्‍होंने कहा कि हमने मानवता के नजरिए से देखा. उनका मानना है कि हमले सही काम किया.’ इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि का समर्थन किया और कहा कि यह निर्णय मानवीय था, भले ही भू-राजनीतिक तनाव के चलते हालात खराब हों. इतना ही नही बल्कि जयशंकर ने सोशल मीडिया पर हो रहे हंगामे को खारिज करते हुए हिंद महासागर की हकीकत बताई और कहा कि डिएगो गार्सिया पर 50 साल से अमेरिकी बेस है, जिबूती में 2000 से विदेशी बेस हैं, और हम्बनटोटा हाल ही में चर्चा में आया है.

भारत का उदय हमारी ताकत से होगा, दूसरों की गलतियों से नहीं

इसके साथ ही जयशंकर ने कहा कि भारत पिछले 10 साल से क्षेत्र में व्यापार और कनेक्टिविटी को बहाल करने के लिए ‘इकोसिस्टम’ बना रहा है. उनका कहना है कि भारत ने संसाधन, प्रोजेक्ट्स और प्रतिबद्धताओं को लेकर कड़ी मेहनत की है. इसके साथ ही भारत के बढ़ते कदम से क्षेत्रीय पार्टनरों को फायदा होगा. साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि ‘जो हमारे साथ काम करेंगे, उन्हें ज्यादा फायदा मिलेगा. भारत का उदय हमारी ताकत से तय होगा, दूसरों की गलतियों से नहीं.’ विदेश मंत्री ने मर्चेंट नेवी के जोखिम पर जोर देते हुए कहा कि भारत उनकी सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है.

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