न रॉकेट, न ड्रोन…, कैसा है इजरायल का आयरन बीम वाला हथियार, पहली बार हुआ इस्तेमाल

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Iron Beam : इजरायल की डिफेंस टेक्नोलॉजी में एक नया अध्याय जुड़ गया है. कुछ ही दिन पहले ईरान-इजरायल जंग के बीच इजरायल ने पहली बार ‘आयरन बीम’ नाम के हाई-पावर लेजर सिस्टम को असली जंग में इस्तेमाल किया. बता दें कि ये सिस्टम लेबनान से हिजबुल्लाह के दागे गए रॉकेट्स को हवा में ही नष्ट कर रहा है. लेकिन आयरन बीम क्या है और ये कैसे काम करता है? इसके साथ ही इजरायल ने इसे पहली बार कब और क्यों इस्तेमाल किया? आइए जानते हैं.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार आयरन बीम इजरायल का एक एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम है, जो कि हाई एनर्जी लेजर वेपन सिस्टम (HELWS) पर आधारित है. बता दें कि इसे राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने बनाया है. जो रॉकेट्स, मोर्टार, आर्टिलरी शेल्स और ड्रोन्स जैसे छोटी रेंज के खतरे को कुछ किलोमीटर दूर से ही खत्म कर देता है. जानकारी के मुताबिक, ये इजरायल की मल्टी-लेयर डिफेंस का हिस्सा है, आयरन बीम को ‘ओर ईतान’ (Or Eitan) भी कहा जाता है, जो हिब्रू में ‘मजबूत लाइट’ का मतलब है.

गोला-बारूद की मैगजीन अनलिमिटेड

बता दें कि इसकी बैटरी में एक एयर डिफेंस रडार, लेजर जनरेटर और कमांड व्हीकल होते हैं. इसके साथ ही ये स्टैंड-अलोन काम कर सकता है या फिर दूसरे सिस्टम्स के साथ मिलकर भी एक्टिव हो सकता है. सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इसमें गोला-बारूद की मैगजीन अनलिमिटेड है, क्योंकि ये बिजली से चलता है और साथ ही इसमें कोई मिसाइल की भी जरूरत नहीं पड़ती है. बस एक लेजर बीम निकलती है और दुश्मन खत्म.

किस प्रकार काम करता है आयरन बीम

जानकारी के मुताबिक, आयरन बीम फाइबर लेजर टेक्नोलॉजी पर काम करता है.

खोजबीन: रॉकेट या ड्रोन जैसा कोई खतरा आते ही सर्विलांस सिस्टम (रडार) उसे डिटेक्ट करता है. साथ ही ये ट्रैकिंग व्हीकल्स की मदद से ट्रैक करता है.

  • हमला:बता दें कि यह टारगेट को मारने के लिए लेजर बीम जनरेट होती है, जो लाइट की स्पीड (3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड) पर टारगेट तक पहुंचती है. बताया जा रहा है कि ये सैकड़ों छोटी-छोटी बीम्स (कॉइन साइज की) को एक साथ फोकस करती है, जो कि टारगेट पर इकट्ठा होकर गर्मी पैदा करती हैं.
  • तबाही:माना जाता है कि इसकी गर्मी इतनी तेज होती है कि टारगेट का बाहरी हिस्सा पिघल जाता है या फट जाता है. साथ ही ये पूरा प्रोसेस सेकंड्स में हो जाता है. जानकारी के मुताबिक, अगर एक बीम टारगेट पर हिट होती है, तो बाकी बीम्स उसी स्पॉट पर रीडायरेक्ट हो जाती हैं, जिससे डिस्पर्शन (फैलाव) कम होता है.
  • फायदा:हर शॉट की लागत सिर्फ 2-10 डॉलर (बिजली का खर्च), जबकि आयरन डोम जैसी मिसाइल से एक इंटरसेप्ट में हजारों डॉलर लगते हैं. बता दें कि इससे कोलेटरल डैमेज भी बहुत कम होता है. ऐसे में इसकी रेंज करीब 10 किलोमीटर तक है.

 रोरिंग लॉयन में हुआ इस्तेमाल

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार आयरन बीम का आइडिया 2014 में आया, जब इजरायल ने इसे पहली बार अनवील किया. 10 साल से ज्यादा की रिसर्च के बाद, सितंबर 2025 में इसे ऑपरेशनल डिक्लेयर किया गया. दिसंबर 2025 में पहला कॉम्बैट-रेडी सिस्टम इजरायल एयर फोर्स को दिया गया. राफेल और एलबिट सिस्टम्स ने मिलकर इसे बनाया और इजरायल ने 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा इन्वेस्ट किए. टेस्टिंग में इसे रॉकेट्स, मोर्टार और ड्रोन्स के खिलाफ सक्सेसफुल पाया गया. दुनिया में ये पहला फुली ऑपरेशनल हाई-पावर लेजर सिस्टम है.

जंग में आयरन बीम का पहला बड़े स्केल यूज

अब 2026 की ईरान-इजरायल जंग में आयरन बीम का पहला बड़े स्केल यूज हो रहा है. 2 मार्च को IDF ने कन्फर्म किया कि हिज्‍बुल्‍लाह के रॉकेट्स को आयरन बीम ने मिड-एयर में ही नष्ट किया. बता दें कि ये ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ का हिस्सा है, जहां पर इजरायल ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स से लड़ रहा है. इस दौरान वीडियो में स्‍पष्‍ट देखा जा सकता है कि लेजर बीम से रॉकेट्स फटते दिख रहे हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं.

आयरन बीम के फायदे

  • फायदे:सस्ता, तेज और अनलिमिटेड शॉट्स मार सकता है. ड्रोन वॉरफेयर में क्रांति ला सकता है, इसके साथ ही ड्रोन्स सस्ते होते हैं और मिसाइल से रोकना महंगा पड़ सकता है.
  • चुनौतियां:अभी रेंज 10 किलोमीटर तक सीमित है,

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