धर्म की पढ़ाई बनाम सेना में भर्ती की लड़ाई… कैसे टूट रहा इजरायल?

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Israel army: इजरायल में छात्र की गिरफ्तारी के बाद एक खास समुदाय का आंदोलन शुरू हो गया. 20 जुलाई की रात हरदी नाम के अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के हजारों प्रदर्शनकारी इजरायल में एक मिलिट्री जेल और तेल अवीव में अटॉर्नी जनरल के घर के बाहर जमा हो गए. वो सेना में भर्ती से बचने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार किए गए एक येशिवा छात्र की गिरफ्तारी का गुस्से में विरोध कर रहे थे. बता दें कि येशिवा छात्र हरदी समुदाय के वो पुरुष होते हैं जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी धार्मिक ग्रंथों की पढ़ाई में लगाते हैं.

मिलिट्री पुलिस के साथ भिड़ें प्रदर्शनकारी

इजरायली मीडिया के मुताबिक, बेइट लिड मिलिट्री जेल में हुए विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए. एक समय पर, उन्होंने सेना के बेस (जहां जेल स्थित है) के चारों ओर लगी बाड़ को तोड़ दिया और मौके पर मौजूद मिलिट्री पुलिस के साथ भिड़ गए.

यूनाइटेड तोराह जुडिज्म पार्टी के प्रमुख MK यित्जाक गोल्डनॉफ इस रैली में शामिल हुए, एक असामान्य कदम के तहत, गुर हसीदिक नेता, रब्बी याकोव आर्य एल्टर भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे, जिसमें मुख्य रूप से समुदाय के युवा थे. हरदी समुदाय से जुड़े न्यूज साइटों ने बताया कि देशभर से बसों में भरकर लाए गए लगभग 25 हजार अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स प्रदर्शनकारी इस सभा में शामिल हुए.

क्यों मचा बवाल?

इजरायल में एक समुदाय-हरदी को छोड़कर बाकि सभी समुदाय के पुरूषो के लिए मिलिट्री में सेवा देना अनिवार्य है, जिसे लेकर अकसर विवाद होता रहता है. खुद सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर ने इसपर सवाल उठाया था. दरअसल, इस समय नेतन्याहू की लोकप्रियता कम हो रही है और इस चक्कर में उनकी गठंबधन सरकार ने कानून बनाकर सेना में भर्ती से बचने वाले हरदी लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी. लेकिन पिछले सप्ताह वहां के हाई कार्ट ऑफ जस्टिस ने इस कानून के लागू होने पर रोक लगा दी थी. इसके बाद वहां एक युवक की गिरफ्तार किया गया जो सेना में भर्ती होने से छूट के लिए भर्ती केंद्र पहुंचा था. इसी के विरोध में यह प्रर्दशन किया गया.

इस दौरान, हरदी समुदाय से जुड़े राजनीतिक दलों ने मांग की थी कि 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को देखते हुए पिछले सप्ताह इजरायली संसद के भंग होने से पहले यह कानून पारित किया जाए. इस मुद्दे ने इजरायलियों को बुरी तरह विभाजित कर दिया है और यह एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया. लेकिन कानून पारित होने के ठीक एक दिन बाद, हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस ने 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले एक अस्थायी आदेश के माध्यम से कानून के लागू होने पर रोक लगा दी.

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