Israel-Lebanon War: मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत होने जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि दोनों देशों के नेता 34 साल बाद पहली बार सीधे बातचीत करने वाले हैं. यह बैठक गुरुवार को प्रस्तावित है और इसे दशकों पुरानी दुश्मनी में संभावित पहली दरार माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच आखिरी बार 1983 में शीर्ष स्तर पर बातचीत हुई थी.
अभी भी सैन्य अभियान जारी रखना चाहता है इजरायल
लेबनान की ओर से संकेत मिले हैं कि किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत से पहले सीजफायर की मांग की जा सकती है. वहीं, इजरायल अभी भी सैन्य अभियान जारी रखना चाहता है और बफर जोन बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच थोड़ी राहत लाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने लिखा कि करीब 34 साल से दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई और अब यह ऐतिहासिक मुलाकात होने जा रही है.
नेतन्याहू और राष्ट्रपति औन के बीच होगी बातचीत
हालांकि ट्रंप ने नेताओं के नाम स्पष्ट नहीं किए, लेकिन माना जा रहा है कि यह बातचीत इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच होगी. इजरायल और लेबनान के बीच संबंध हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों देश 1948 से ही तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में हैं और उनके बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं है. दोनों देशों के बीच आखिरी बार शीर्ष स्तर पर बातचीत 1983 में हुई थी, जब अमेरिका की मध्यस्थता में एक अस्थायी समझौता हुआ था.
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष तेज
इसके बाद 1993 में बातचीत हुई, लेकिन वह भी नेताओं के स्तर पर नहीं थी. यह संभावित बैठक ऐसे समय हो रही है जब इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष तेज है. इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं और दक्षिणी इलाकों में जमीनी ऑपरेशन भी चला रहा है. संघर्ष की वजह से लेबनान में अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और मेडिकल स्टाफ भी शामिल हैं. दूसरी तरफ, इजरायल के भी कई सैनिक मारे गए हैं. इस पूरे संघर्ष का सीधा संबंध ईरान-इजरायल-अमेरिका तनाव से भी जुड़ा है, जिसने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है.
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