पाक-चीन में बढ़ते सम्बन्ध से डरा बलूचिस्तान, विदेश मंत्री जयशंकर को भेजे पत्र में भारत को भी एलर्ट रहने की अपील!

New Delhi: बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक गठबंधन को लेकर सशंकित हैं. वो इसे बहुत खतरनाक मान रहे हैं. इसे लेकर बलूच में मानवाधिकार के लिए आवाज उठाने वाले जाने-माने डिफेंडर मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा है. साथ ही नए साल के मौके पर जयशंकर को संदेश भी भेजा है.

गंभीर मानवाधिकार से संबंधित अत्याचार

मीर यार बलूच ने जयशंकर को पाकिस्तान के कब्जे, सरकार की तरफ से प्रायोजित आतंकवाद और पिछले 79 सालों में बलूचिस्तान के लोगों पर हुए गंभीर मानवाधिकार से संबंधित अत्याचारों के बारे में अवगत कराया है. मीर बलूच ने 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऑपरेशन सिंदूर के तहत उठाए गए साहसी और पक्के इरादों वाले कदमों की सराहना की. मीर ने इन कदमों को भारत की जबरदस्त हिम्मत, क्षेत्रीय सुरक्षा और इंसाफ के लिए पक्के इरादे का सबूत बताया.

नए साल 2026 की दिल से बधाई

उन्होंने लिखा है कि बलूचिस्तान रिपब्लिक के छह करोड़ देशभक्त नागरिकों की तरफ से हम भारत के 140 करोड़ लोगों, संसद के दोनों सदनों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और सभी जाने-माने लोगों को नए साल 2026 की दिल से बधाई देते हैं. यह मौका उन गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, कमर्शियल, अर्थव्यवस्था, राजनयिक, सुरक्षा और कई तरह के रिश्तों पर सोचने और जश्न मनाने का मौका देता है, जिन्होंने सदियों से भारत और बलूचिस्तान को जोड़ा है.

आध्यात्मिक रिश्तों का हमेशा रहने वाला प्रतीक

चिट्ठी में आगे कहा गया है कि इन पक्के रिश्तों का उदाहरण हिंगलाज माता मंदिर (नानी मंदिर) जैसी पवित्र जगहें हैं जो हमारी साझा विरासत और आध्यात्मिक रिश्तों का हमेशा रहने वाला प्रतीक हैं. मीर यार ने चेतावनी दी है कि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को उसके आखिरी चरण में पहुंचा दिया है.

बलूचिस्तान में अपने सैन्य बल तैनात कर सकता है चीन

मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्र फोर्स की क्षमता को और मजबूत नहीं किया गया. अगर उन्हें पुराने पैटर्न की तरह नजरअंदाज किया जाता रहा तो यह सोचा जा सकता है कि चीन कुछ ही महीनों में बलूचिस्तान में अपने सैन्य बल तैनात कर सकता है. 60 मिलियन बलूच लोगों की मर्जी के बिना बलूचिस्तान की जमीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक ऐसा खतरा और चुनौती होगी, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.

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