ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर पर संभाला मोर्चा, चेतावनी के बाद सऊदी अरब के तीन तेल टैंकरों ने लिया यू-टर्न

US-Iran War: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की भी ईरान जंग में सीधी एंट्री हो गई है. उन्होंने लाल सागर पर मोर्चा संभाल लिया है. हूती विद्रोही ईरान के ही कहने पर काम करते हैं, यहां तक कि उनकी ट्रेनिंग और कमांड भी आईआरजीसी से ही चलती है. हाल ही में सऊदी के साथ हुए संघर्ष के बाद दोनों आमने-सामने आ गए हैं. हूतियों के चेतावनी भरे बयान के बाद सऊदी अरब के तीन तेल टैंकरों ने लाल सागर में मुड़कर अपनी दिशा बदल ली. ये टैंकर भारत और चीन के लिए कच्चा तेल ले जा रहे थे. हूतियों की धमकी के बाद टैंकर अब स्वेज नहर की ओर जा रहे हैं.

स्वेज नहर की ओर बढ़ रहे थे तीन टैंकर

तीन टैंकर– शिन लॉन्ग यांग, रोडोस और अमेजन, सऊदी अरब के यंबू बंदरगाह से तेल लोड करके स्वेज नहर की ओर बढ़ रहे थे. हूतियों की चेतावनी मिलते ही तीनों ने लाल सागर के मुहाने पर यमन तट से बचने के लिए यू-टर्न मार लिया. इसी हफ्ते हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा कर दी. उन्होंने शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी कि सऊदी बंदरगाहों पर माल लोड या उतारने वाली किसी भी जहाज को किसी भी जगह निशाना बनाया जा सकता है.

चीन के लिए 20 लाख बैरल तेल लोड

शिन लॉन्ग यांग (VLCC) ने चीन के लिए 20 लाख बैरल तेल लोड किया था. रोडोस ने भारत के लिए करीब 7 लाख बैरल तेल लिया था और अमेजन भी भारत के लिए तेल लेकर जा रहा था. ऐसे में टेंशन भारत की भी बढ़ गई है. तीनों टैंकरों ने मंगलवार को अपना ट्रैकर बंद कर दिया, जिससे उनकी लोकेशन छिपाने की कोशिश साफ दिखी. अगर हूती हमले बढ़े तो एशिया जाने वाले तेल टैंकरों को स्वेज नहर से भूमध्य सागर होते हुए अफ्रीका के चारों ओर घूमकर जाना पड़ेगा.

तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं

इससे यात्रा में कई हफ्ते लग जाएंगे, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है. इसके अलावा एक और बड़ा टैंकर न्यू प्राइम भी यंबू पहुंचने से पहले ओमान के पास से मुड़ गया. हालांकि यंबू बंदरगाह अभी भी उन जहाजों को तेल लोड कर रहा है जो पहले से लाल सागर में हैं या स्वेज से आ रहे हैं. हूती विद्रोहियों ने सना और उसके आसपास के इलाके पर कब्जा जमा रखा है, जिसके पास ही बाब-अल-मंदेब होर्मुज यानि द गेट ऑफ टियर्स पर नियंत्रण रखते हैं.

सऊदी अरब के लिए यंबू बंदरगाह तेल निर्यात का मुख्य रास्ता

यह होर्मुज लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब के लिए यंबू बंदरगाह तेल निर्यात का मुख्य रास्ता बन गया था. लाखों बैरल तेल रोज इसी रास्ते से एशिया भेजा जा रहा था. अब हूतियों की धमकी से यह वैकल्पिक रास्ता भी खतरे में पड़ गया है. बीमा कंपनियों ने 24 घंटे के अंदर बीमा की कीमतें बढ़ा दी हैं.

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