अमेरिका-चीन तो नहीं पहुंचे, क्या जापान होगा सफल… जापान ने मंगल के चंद्रमा पर भेजा स्पेसशिप, फोबोस से लाएगा सैंपल

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Japan Mars Moon: जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने अंतरिक्ष की कदम बड़ा कदम बढ़ाते हुए एक एक बहुत ही महत्वाकांक्षी स्पेस मिशन लॉन्च किया है. JAXA ने मंगल ग्रह के रहस्यमय चंद्रमा से नमूने लेने के लिए अभूतपूर्व अभियान के तहत मंगलवार को एक स्पेसशिप को रवाना किया. मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) नाम के इस स्पेसशिप को जापान के प्रमुख H3 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया है.

‘फोबोस’ से सैंपल लेकर आएगा मिशन

इस मिशन का लक्ष्य मंगल के चंद्रमा फोबोस से नमूने इकठ्ठा करना है. बता दें कि फोबोस मंगल के दो छोटे चंद्रमाओं में है और ग्रह के करीब है. यह अंतरिक्ष यान अगले साल अगस्त में मंगल की कक्षा में पहुंचेगा. यह फोबोस पर एक रोबोटिक प्रोब और एक रोवर को उतारेगा. JAXA ने बताया कि यह मिशन 10 ग्राम मिट्टी और चट्टान के नमूने इकठ्ठा करेगा. यह 2031 में वापस लौटेगा.

मंगल के चंद्रमा पर पहला मिशन

बता दें कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने मंगल ग्रह पर अब तक 9 अंतरिक्षयान सफलतापूर्वक उतारे हैं. चीन ने भी साल 2021 में मंगल पर अपना यान उतारा है. लेकिन अभी तक कोई भी मिशन फोबोस या उसके साथी चंद्रमा डीमोस तक नहीं पहुंच पाया है और न ही उसके चंद्रमाओं से आज तक नमूने वापस लाने में भी कोई सफल हुआ है.

फोबोस मंगल ग्रह की सतह से 6000 किमी की दूरी पर है. 22.5 किमी व्यास वाला यह गड्ढों से भरा चंद्रमा दिन में तीन बार मंगल के चक्कर लगाता है. मॉर्शियन मून एक्सप्लोरेशन स्पेसशिप को मंगलवार सुबह 4:41 बजे जापान के तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया. धरती से रवाना होने के एक घंटे बाद अंतरिक्ष यान रॉकेट के ऊपरी हिस्से से अलग हुआ. इसके बाद JAXA के वैज्ञानिकों ने लॉन्च को सफल घोषित किया.

मेन लैंडर के पहले उतरेगा छोटा रोवर

इस मिशन के लिए दुनिया की पांच अंतरिक्ष एजेंसियां एक साथ आई हैं, जिसका नेतृत्व JAXA कर रही है. वहीं, इस मिशन की लागत 578 मिलियन डॉलर है. इसमें 5 टन वजनी एक अंतरिक्ष यान शामिल है. अगली गर्मियों में जब यह मंगल के पास पहुंचने के बाद यह एक छोटा फ्रांसीसी-जर्मन रोवर छोड़ेगा. ऐसे में यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो चार पहियों वाला यह रोवल फोबोस की सतह पर कई मिनटों तक उछलता रहेगा और फिर रुक जाएगा.

100 दिनों तक सतह का सर्वे करेगा रोवर

JAXA के मुताबिक यह रोवर 100 दिनों तक सतह का सर्वे करेगा, ताकि चार पैरों वाले स्थिर लैंडर- एक मुख्य यान- के आने से पहले सुरक्षित लैंडिंग और सैंपल लेने की जगह खोजी जा सके. मुख्य यान ही वहां से सैंपल जमा करेगा. बता दें कि यह लैंडर फोबोस पर केवल दो घंटे बिताएगा. इस दौरान वह ड्रिलिंग करेगा और वैक्यूम की मदद से सैंपल इकठ्ठा करेगा. इसके बाद यह वापस अंतरिक्ष में रवाना हो जाएगा. मिशन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि नवम्बर 2030 में मंगल की कक्षा छोड़ेगा. इसके पहले यह स्पेसशिप मंगल के दूसरे स्पेसशिप डीमोस के पास से गुजरते हुए उसका भी अवलोकन करेगा.

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