जापान में बनेगी देश की दो राजधानी? भूकंप के झटकों के बीच संसद में कानून पास, मचा बवाल

Tokyo: जापान की संसद ने देश में भूकंप के झटकों के बीच दो राजधानी बनाने का कानून पास किया है. इसका मतलब है कि जिस टोक्यो के पास हमेशा से जापान के सिर का ताज होने का गौरव हासिल था, उसे अब पॉवर शेयर करना पड़ेगा. असल में निकट भविष्य में भयावह भूकंप के झटकों की रिपोर्ट के बीच राजधानी का बैकअप तैयार करने का फैसला किया गया है.

अलग ही सियासी महाभारत

लेकिन महाविनाश की इस आशंका के बीच देश के कुछ शहरों के बीच अलग ही सियासी महाभारत छिड़ गई है, जिसमें इंद्रप्रस्थ यानी राजधानी के लिए दांवपेंच शुरू हो गया है. जापान टोक्यो का विकल्प तलाश रहा है. जापानी संसद ने टोक्यो के अलावा एक दूसरी राजधानी बनाने का रास्ता साफ करते हुए एक नया कानून पास कर दिया है. संसद के निचले सदन में तो यह बिल आसानी से पास हो गया था लेकिन ऊपरी सदन में इसे पास कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.

प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम

नियमों के मुताबिक दूसरी राजधानी बनने वाले इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम से कम होना चाहिए. इसके अलावा मौजूदा राजधानी के बैकअप के रूप में काम करने के लिए वहां सरकारी बुनियादी ढांचा, अर्थव्यवस्था का दायरा, आबादी और प्रशासनिक क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए. इस कानून के पास होने के बाद अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि आखिर जापान की दूसरी राजधानी कौन सा शहर बनेगा? इसको लेकर देश के कुछ अहम शहरों के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है.

रिक्टर स्केल पर 7 की तीव्रता का भूकंप 

फिलहाल टोक्यो जापान की राजधानी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक जापानी सरकार का अनुमान है कि अगले 30 सालों के अंदर टोक्यो और उसके आस-पास के इलाके में रिक्टर स्केल पर 7 की तीव्रता का भूकंप आने की संभावना 70 प्रतिशत तक है. सरकार का कहना है कि देश में काम-काज लगातार चलता रहे और सिस्टम ठप ना हो इसलिए दूसरी राजधानी का होना बेहद जरूरी है. जापान में अगर ऐसा होता है तो देश के प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद के साथ ही बैंक और दफ्तरों जैसे वित्तीय संस्थानों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

आर्थिक कामकाज को संभाल लेगी

कानून का प्रस्ताव रखते समय सरकार ने यह तर्क दिया था कि जरूरत पड़ने पर यह दूसरी राजधानी देश के सभी अहम राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक कामकाज को संभाल लेगी. सरकार का यह भी तर्क है कि इसके पीछे एक आर्थिक वजह भी है. जापान की अर्थव्यवस्था और आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ टोक्यो में ही केंद्रित है, जिसे यह कानून ठीक करना चाहता है. फिलहाल देश की कुल आर्थिक कमाई का पांचवां हिस्सा अकेले टोक्यो से आता है और देश की करीब 30 प्रतिशत आबादी यहीं पर रहती है.

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