Kuwait Pakistan Agreement: पाकिस्तान लंबे समय से मुसलमान देशों के बीच खुद को लीडर के तौर पर स्थापित करने की कोशिशों में जुटा है. वह दुनिया का एकमात्र परमाणु संपन्न मुस्लिम राष्ट्र है, लेकिन गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई की मार से बदहाल है. बावजूद इसके वह अकसर अपनी परमाणु क्षमता और बड़ी सेना के दम पर ही मुसलमान देशों के बीच खुद का वर्चस्व बनाने में जुटा रहता है.
इसी के आधार पर पाकिस्तान ने बीते साल सऊदी अरब से एक सैन्य समझौता किया था, जिसमें तय हुआ था कि किसी भी विपरीत परिस्थिति में दोनों देश मिलकर लड़ेंगे. इस तरह पाकिस्तान ने सैन्य ताकत से सऊदी अरब को मदद का भरोसा दिया तो वहीं सऊदी अरब ने निवेश और कच्चे तेल को लेकर मदद का भरोसा लिया. अब कुछ ऐसा ही समझौता वो कुवैत के साथ करने की तैयारी कर रहा है.
पाकिस्तान और कुवैत के बीच होगा समझौता
पाकिस्तान और कुवैत के बीच यह समझौता ऐसे समय में होने वाला है, जब ईरान और अमेरिका के बीच जंग चल रही है.ऐसे में इन देशों के आगे सुरक्षा का एक संकट पैदा हुआ है. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान ने कुवैत के सामने रक्षा समझौते का प्रस्ताव रखा है. इस तरह पाकिस्तान एक ओर डिफेंस डील करके अपने वर्चस्व को स्थापित करने की कोशिश में है तो वहीं कुवैत से तेल और निवेश की सुरक्षा चाहता है.
ईरान के खिलाफ जंग में उतरेगा पाकिस्तान
रिपोर्ट के मुताबिक, अभी इस समझौते को लेकर बातचीत शुरुआती स्तर पर है. इस बीच चर्चा यह भी हैं कि क्या ईरान के खिलाफ पाकिस्तान भी जंग में उतरेगा. क्योंकि ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब पर हमले किए हैं. और पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौते में कहा गया है कि किसी एक देश पर हमले का दोनों मिलकर जवाब देंगे.
ऐसे में पाकिस्तान का कहना है कि अगर ईरान ने हमले नहीं रोके तो वह भी जवाबी ऐक्शन में शामिल हो सकता है. बता दें कि पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ हुए समझौते के तहत अरब में अपने सैनिक भी भेजे हैं. इसके अलावा फाइटर जेट, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य रक्षा सामग्रियां भी तैनात की गई हैं. फिलहाल. यह डिटेल नहीं मिल पाई है कि कुवैत और पाकिस्तान के बीच होने वाले समझौते में क्या-क्या प्रावधान रहेंगे, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कमोबेश उसी तर्ज पर होगा, जैसा पैक्ट सऊदी अरब के साथ हुआ था.