New Delhi: पूर्व भारतीय स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कहा है कि उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब कोई भी शख्स उनके साथ अपनी बेटी का विवाह नहीं करना चाहता था. उन्होंने बताया कि उन पर लगे आरोपों ने कैसे उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया. दरअसल, लक्ष्मण एक साक्षात्कार में अपने जीवन के मुश्किलों दौर को साझा कर रहे थे. शिवरामकृष्णन की माने तो उन्हे नस्लवाद के अलावा भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा था.
होनहार खिलाड़ियों में होती थी गिनती
एक समय था जब उनकी गिनती देश के होनहार खिलाड़ियों में होती थी, मगर कुछ समय बाद ही लोगों ने उन्हें शराबी कहना शुरु कर दिया. यही नहीं उन्हें ड्रग्स के आरोपों को भी सहना पड़ा. जिसकी वजह से वह डिप्रेशन में चले गए. लक्ष्मण के मुताबिक, लोग बुरी बातें फैलाना पसंद करते हैं. मैंने 16 से 19 साल की उम्र में दौरे करने शुरु कर दिए थे. छोटे उम्र में मुझे लोग शराब कैसे सर्व कर सकते हैं?
मैंने कभी-कभार पी थी बीयर
मैंने अपने जीवन में कभी भी ड्रग्स नहीं लिया. हां बाद में मैंने कभी-कभार बीयर पी थी. जिसके लिए मैं मना नहीं करता हूं. मगर सोचिए 19 साल के लड़के को शराबी या ड्रग एडिक्ट कहा जाए तो कितना बुरा लगता है. भारतीय क्रिकेटर ने बताया कि उनके माता-पिता ने उनकी शादी के लिए एक विज्ञापन निकाला था. जिसमें उन्होंने एक टेस्ट क्रिकेटर और फ्लैट मालिक के रूप में उनका जिक्र किया था.
कोई भी नहीं करना चाहता था अपनी बेटी की शादी
इसके साथ ही पोस्ट बॉक्स नंबर भी दिया गया था. दो सप्ताह बाद जब मैंने पोस्ट बॉक्स को खोला तो वहां कोई जवाब नहीं था. शिवरामकृष्णन ने कहा कि इसका मतलब साफ था कि लोगों ने मेरी छवि इतनी खराब कर दी थी कि कोई भी अपनी बेटी की शादी मुझसे नहीं करना चाहता था. भारतीय टीम से बाहर होना भी शिवरामकृष्णन के लिए आसान नहीं था. वे पूरी तरह टूट गए थे. उन्होंने कहा कि 1987 वर्ल्ड कप से लौटने के बाद तमिलनाडु के एक चयनकर्ताओं ने मुझे बुलाया. उन्होंने मुझे प्रेस के सामने यह कहने को कहा कि मैं अनफिट हूं.
चाहें तो मुझे टीम से बाहर निकाल दें
मैंने कहा कि मैं ऐसा नहीं करूंगा. मैं आपके लिए चीजें आसान नहीं करने वाला हूं. आप चाहें तो मुझे टीम से बाहर निकाल सकते हैं. भारतीय टीम से बाहर होने के बाद वह निराश रहने लगे थे. उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह से निराश था. खुद को मैं आईने में भी नहीं देखना चाहता था. कुछ ड्रिंक्स लेता था और सो जाता था. क्योंकि मैं कुछ भी बर्दाश्त नहीं कर सकता था. मैं जब नींद से उठता था. तब मुझे लगता था कि मैं मरने वाला हूं.
सोने के लिए लेना पड़ा शराब का सहारा
शिवरामकृष्णन ने स्वीकार किया कि उन्हें सोने के लिए शराब का सहारा लेना पड़ा. इस दौरान मन में कई बार आत्महत्या के विचार भी आए. उन्होंने कहा कि दुबई में यात्रा करते समय कभी-कभी कोई स्पीड लिमिट नहीं होती थी. जब गाड़ी काफी तेज चलती थी तो मेरे मन में ख्याल आता था कि मैं दरवाजा खोलकर कूद जाऊं, लेकिन किसी न किसी तरह कुछ ऐसा हुआ कि मैं यह मूर्खतापूर्ण कार्य करने से बच गया.
काफी डरावना लगता था सब कुछ
शिवरामकृष्णन ने कहा कि आंखें बंद करने पर ऐसी छवियां दिखाई देती थी. जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. सब कुछ काफी डरावना लगता था. आंखें खोलने पर कुछ नहीं होता था. इस दौरान इतना थक जाते थे कि सोने का मन करता था. आंखें बंद करते थे. फिर खुल जाती थी और नींद गायब हो जाती थी. हर बार खुद को और ज्यादा उलझा लेते थे. बाहर पूरी दुनिया कह रही होती थी. देखो मैंने तुमसे कहा था. इसके पीछे की वजह शराब है.
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