Maritime trade: इस समय में समुद्र में प्रदूषण भारत, चीन समेत दुनिया के तमाम विकसित और विकासशील देशों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है. इसी बीच चीन के समुद्री सुरक्षा सरकार ने बताया कि देश की बढ़ती आर्थिक की वजह से शिपिंग में बढ़ोतरी और सही पर्यावरण कानूनों की कमी की वजह से देश के समुद्रों में बहुत ज्यादा प्रदूषण हो रहा है.
कैथोलिक मिशनरी समूह पाइम की न्यूज एजेंसी एशिया न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के संचार मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष देश में समुद्री मार्ग से करीब 1.8 अरब टन माल का परिवहन किया गया. वहीं, चीन के करीब 90 प्रतिशत आयातित कच्चे तेल की ढुलाई समुद्र के रास्ते हुई, जिसकी कुल मात्रा लगभग 11 करोड़ टन रही.
ऑयल स्पिल की घटनाओं में भी वृद्धि
समुद्री परिवहन में तेज बढ़ोतरी और इस क्षेत्र में प्रभावी कानूनी ढांचे की कमी के कारण तेल रिसाव (ऑयल स्पिल) की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है. साल 1973 से 2003 के बीच चीन के तटीय क्षेत्रों में 2,350 से अधिक ऑयल स्पिल दर्ज किए गए, यानी औसतन हर 4.6 दिन में तेल रिसाव की एक घटना हुई. इनमें से कई घटनाएं इतनी गंभीर थीं कि उन्होंने देश के पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया.
इसी वर्ष 4 अप्रैल को पुर्तगाल का तेल टैंकर ‘आर्टेगा’, जो यमन से लगभग 1.2 लाख टन कच्चा तेल लेकर आ रहा था, पूर्वोत्तर चीन के लियाओनिंग प्रांत स्थित डालियान बंदरगाह के पास एक चट्टान से टकराकर फंस गया. 2 जुलाई को एक चीनी तेल टैंकर डालियान पोर्ट पर मलेशिया में रजिस्टर्ड 9,000 टन के जहाज से टकरा गया. यह जहाज दक्षिणी चीन के ग्वांगडोंग प्रांत के ग्वांगझू में 3,800 टन डीजल फ्यूल ले जा रहा था. इस हादसे की वजह से तेल समुद्री पानी में फैल गया. इसके बाद पर्यावरण पर इसका प्रभाव कम करने के लिए कई दिनों तक दर्जनों नावों और हेलीकॉप्टरों को लगातार काम करना पड़ा.
चीन तेल प्रदूषण पर इंटरनेशनल फंड कन्वेंशन का हिस्सा
वहीं, पिछले साल दिसंबर में, पनामा और यमन के दो कंटेनर जहाज हांगकांग के दक्षिण में पर्ल नदी के मुहाने पर टकरा गए, जिससे 1,200 टन तेल समुद्र में लीक हो गया. इस दुर्घटना के लिए इमरजेंसी मदद का खर्च 120 मिलियन युआन (14.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर) था. हालांकि चीन तेल प्रदूषण पर इंटरनेशनल फंड कन्वेंशन का हिस्सा है, जो इस तरह के एक्सीडेंट से होने वाले नुकसान के मामले में वित्तीय मुआवजा देता है, लेकिन यह सिर्फ हांगकांग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव क्षेत्र पर लागू होता है. इसलिए, चीन में कहीं और तेल प्रदूषण से होने वाले नुकसान को फंड कवर नहीं कर सकता.