New Delhi: 14 अरब और इस्लामिक देशों ने इज़राइल में अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee के हालिया बयान को खतरनाक और भड़काऊ करार दिया है. दरअसल, यह विवाद उस इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ, जिसमें हकाबी ने अमेरिकी कमेंटेटर Tucker Carlson से बातचीत के दौरान कहा था कि यदि इज़राइल पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण ले ले तो यह ठीक होगा.
भूभाग पर केंद्रित थी चर्चा
चर्चा कथित ऐतिहासिक दावों और यूफ्रेट्स नदी (इराक) से लेकर नील नदी (मिस्र) तक के भूभाग पर केंद्रित थी. उधर, विवाद बढ़ने के बाद हकाबी ने अपनी टिप्पणी को कुछ हद तक अतिशयोक्तिपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इज़राइल अपने मौजूदा क्षेत्र का विस्तार नहीं कर रहा है और उसे अपने वर्तमान भूभाग में सुरक्षा का अधिकार है.
उत्तेजक बयानों पर रोक लगाने की मांग
वहीं आलोचक देशों ने मांग की है कि ऐसे उत्तेजक बयानों पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचता है. दोहा से जारी संयुक्त बयान पर कतर, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालयों ने हस्ताक्षर किए.
अरब भूमि पर कोई संप्रभुता नहीं
इसके अलावा Gulf Cooperation Council (GCC), League of Arab States (LAS) और Organisation of Islamic Cooperation (OIC) के सचिवालयों ने भी निंदा की. संयुक्त बयान में कहा गया कि इज़राइल को कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब भूमि पर कोई संप्रभुता नहीं है. इस तरह की टिप्पणी को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया.
स्थिरता के लिए गंभीर खतरा
बयान में चेतावनी दी गई कि इज़राइल की विस्तारवादी नीतियां क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं और इससे हिंसा और संघर्ष बढ़ सकता है. यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की उस घोषित नीति से भी मेल नहीं खाती, जिसमें गाज़ा संघर्ष समाप्त करने और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के लिए राजनीतिक रास्ता बनाने की बात कही गई है.
इसे भी पढ़ें. ‘मासूमों की हत्या का बदला जरूर लेंगे!’ PAK की अफगान पर एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान ने दी धमकी

