UPI Digital Payment System: अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे को वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल मानती हैं. भारतीय यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस ने यह साबित किया है कि सरकारी पहल पर आधारित सिस्टम भी निजी भुगतान नेटवर्क्स को कड़ी टक्कर दे सकते हैं. इंटरेस्ट.को.एनजेड द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में UPI ने यह दिखाया है कि वित्तीय समावेशन और तेज विस्तार दोनों को एक साथ हासिल किया जा सकता है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र का पेमेंट मॉडल निजी कंपनियों के नेटवर्क से आगे निकलने की क्षमता रखता है.
डिजिटल फाइनेंशियल हाईवे की ओर बढ़ता भारत
रिपोर्ट में कहा गया है कि UPI के जरिए एक अरब लोगों के बीच प्रति वर्ष 170 अरब से अधिक बार तत्काल और कम लागत में धन हस्तांतरण संभव हुआ है. इससे भारत ने यह संकेत दिया है कि भविष्य में वैश्विक डिजिटल वित्तीय प्रवाह का केंद्र बन सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, जो देश पहले विदेशी मुद्रा की कमी और बाहरी चुनौतियों से जूझ चुका है, उसके लिए इस स्तर का भुगतान ढांचा विकसित करना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में डिजिटल भुगतान
रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल भुगतान को एक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित कर रहा है, न कि महंगी निजी सेवा के तौर पर. यही वजह है कि UPI का दायरा लगातार बढ़ा है और 2024 तक इसके सामान्य उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 4 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि 2017 में यह करीब 3 करोड़ थी. रिपोर्ट में UPI की तुलना अमेरिका के वीजा और मास्टरकार्ड जैसे वैश्विक भुगतान नेटवर्क से करते हुए कहा गया है कि भारत का यह सार्वजनिक और उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क प्लेटफॉर्म अब निजी भुगतान दिग्गजों के समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहा है और उनसे कहीं अधिक तेजी से विस्तार कर रहा है.
खुला और इंटरऑपरेबल नेटवर्क
चीन के अलीपे और वीचैट पे की तुलना UPI से करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रणालियों के विपरीत भारत का नेटवर्क एक खुला और पूरी तरह से अंतरसंचालनीय सार्वजनिक मंच है, जिससे हर बैंक और फिनटेक कंपनी जुड़ सकती है. रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि देश में कुल डिजिटल भुगतान का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा UPI के माध्यम से होता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत में अधिकांश लेनदेन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ही किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता लगातार घट रही है.
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