FII DII Activity: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन मजबूत घरेलू कारकों के कारण घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) बाजार को सहारा दे रहे हैं. 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान एफआईआई ने कैश मार्केट से करीब 7,000 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की. इस अवधि में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा और 13 फरवरी को भारी बिकवाली दर्ज की गई, जब लगभग 7,395 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ.
DII की खरीदारी से बाजार को मजबूती
वेंचुरा के रिसर्च प्रमुख विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इसके बावजूद डीआईआई ने 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को मजबूत समर्थन दिया. 13 और 16 फरवरी को अच्छी खरीदारी देखने को मिली. वैश्विक तनाव और आईटी, वित्तीय तथा ऑटो सेक्टर में कमजोरी के कारण 19 फरवरी को निफ्टी 1.41 प्रतिशत गिरकर करीब 25,454 पर बंद हुआ. हालांकि 20 फरवरी को बाजार में आंशिक सुधार हुआ और चुनिंदा खरीदारी के चलते निफ्टी फिर से 25,600 के करीब पहुंच गया.
टैरिफ फैसलों से व्यापार पर असर
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा IEEPA के तहत लगाए गए व्यापक पारस्परिक टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार व्यवस्था कुछ हद तक संतुलित हो गई है. फिलहाल इन टैरिफ का प्रभाव लगभग 15 प्रतिशत तक सीमित माना जा रहा है. मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कपड़ा, फार्मा, रत्न-आभूषण और मशीनरी जैसे क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों के लिए अल्पकालिक अनिश्चितता बनी रह सकती है, हालांकि पहले प्रस्तावित कठोर कदमों की तुलना में यह स्थिति कम सख्त है और भविष्य में बातचीत के जरिए समाधान की संभावना भी बनी हुई है.
नीतिगत अनिश्चितता और बाजार स्तर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ नीति को आगे बढ़ाने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाने की संभावना जताने से नीतिगत अनिश्चितता बढ़ गई है. इस बीच सेंसेक्स 82,000–82,500 के दायरे से उबरकर सकारात्मक स्तर पर बंद हुआ और महत्वपूर्ण सपोर्ट बनाए रखा. यदि फिर से उतार-चढ़ाव बढ़ता है, तो 82,000–81,800 का स्तर नीचे की ओर सपोर्ट का काम कर सकता है, जबकि ऊपर की ओर 83,500–84,000 पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है.
आगे भी रह सकती है अस्थिरता
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. निफ्टी के लिए 25,300 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 25,700 के आसपास रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है. जब तक बाजार में स्पष्ट तेजी के संकेत नहीं मिलते, तब तक उछाल पर बिकवाली (राइज पर सेल) की रणनीति उपयुक्त मानी जा रही है. निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रमों और कंपनियों के आगामी नतीजों पर भी करीबी नजर रखने की सलाह दी गई है.
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