दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश ने बदला नाम, स्पेलिंग से था परेशान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Nauru: दुनिया के तीसरे सबसे छोटे देश नाउरू ने अपना नाम बदल लिया है इसे अब  ‘रिपब्लिक ऑफ नाओएरो’ (Republic of Naoero) के नाम से जाना जाएगा. सिर्फ 12 हजार लोगों की आबादी वाले इस देश के राष्ट्रपति ने कहा कि यह बदलाव देश की अपनी भाषा में नाम की स्पेलिंग और उच्चारण के हिसाब से किया गया है.

क्या-क्या लिए गए फैसले?

इस बदलाव के बाद देश का इंटरनेशनल कोड NRU से बदलकर NRO हो जाएगा. अब यहां के लोगों को ‘नाउरूअन’ (Nauruan) के बजाय ‘देई-नाओएरो’ (dei-Naoero) कहा जाएगा. विदेश में इसे आम तौर पर ‘नाउ-रू’ कहा जाता है, लेकिन अब नए नाम का उच्चारण ‘नाउ-एरो होगा.

बता दें कि सरकार के फेसबुक अकाउंट पर पिछले गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि इस कदम से दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित यह दूर-दराज का द्वीप देश अपने पारंपरिक नाम पर वापस लौट आएगा. वहीं, सरकार के एक पुराने बयान के मुताबिक, देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘नाउरू’ के नाम से इसलिए जाना जाने लगा क्योंकि विदेशियों के लिए इसका स्थानीय नाम बोलना मुश्किल था. यह नाम पसंद के बजाय सुविधा के कारण चुना गया था.

दरअसल, राष्ट्रपति डेविड एडांग ने जनवरी में संसद में यह प्रस्ताव रखते हुए कहा था कि “इस प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य हमारे देश की विरासत, हमारी भाषा और हमारी पहचान का बेहतर तरीके से सम्मान करना है.” प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन को सांसदों ने जरूरी दो राउंड की वोटिंग में मंजूरी दे दी है. हालांकि यह तुरंत साफ नहीं हो पाया कि दस्तावेज में औपचारिक रूप से संशोधन किया गया है या नहीं.

क्यों खास है यह देश?

बता दें कि 12,000 निवासियों वाला नाउरू, आबादी के लिहाज से तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है. मूंगे और चूना-पत्थर से बने इस छोटे से द्वीप ने कई उतार-चढ़ाव देखे. इसपर पहले जर्मनी का कब्जा था और बाद में ऑस्ट्रेलिया ने इसका प्रशासन संभाला. इसके बाद 1968 में यह एक स्वतंत्र गणराज्य बना. 1970 के दशक में फॉस्फेट माइनिंग से द्वीप पर बहुत दौलत आई. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) के मुताबिक, नाउरू के ज्यादातर हिस्से के नीचे फॉस्फेट के बड़े भंडार थे,जो हजारों सालों में पक्षियों की बीट जमा होने से बने थे. लेकिन बाद में यह इंडस्ट्री ठप हो गई. और 1990 के दशक में नाउरू आर्थिक बर्बादी की कगार पर पहुंच गया.

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