नेपाल में ऐतिहासिक बदलाव: अब देश की जनता को भी राजदूत बनने का मिलेगा मौका, निकाली गई खुली भर्ती

Kathmandu: नेपाल के विदेश मंत्रालय ने देश के इतिहास में पहली बार राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि के पदों के लिए खुले आवेदन मांगे हैं. विदेश मंत्रालय ने सात पन्नों का विस्तृत टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी करते हुए योग्य नेपाली नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं. आवेदन की अंतिम तारीख 5 जून तय की गई है. नेपाल के 17 राजनयिक मिशनों में फिलहाल राजदूत नहीं हैं. अगस्त तक यह संख्या बढ़कर 24 हो जाएगी.

विदेश मंत्रालय ने सूची हटा दी

जिन देशों में नियुक्तियां होनी हैं उनमें भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रिया, बहरीन, बांग्लादेश, मलेशिया, ओमान और सऊदी अरब जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं. हालांकि, विदेश मंत्रालय ने बाद में वह सूची हटा दी जिसमें देशवार आवंटन दिखाया गया था. नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवार की उम्र कम से कम 35 वर्ष होनी चाहिए. उम्मीदवार के पास अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति विज्ञान, कानून, अर्थशास्त्र, लोक प्रशासन या संबंधित विषय में मास्टर्स या उससे ऊंची डिग्री हो तो अच्छा माना जाएगा.

काम करने का अनुभव

इसके अलावा उम्मीदवार के पास कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बहुपक्षीय वार्ताओं, विदेश नीति या अंतरराष्ट्रीय संगठनों में काम करने का अनुभव होना चाहिए. नेपाल सरकार ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार या नैतिक अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति आवेदन नहीं कर सकेंगे. किसी विदेशी देश की स्थायी नागरिकता या रेजिडेंसी रखने वालों को भी मौका नहीं मिलेगा. बालेन शाह की सरकार के राजदूतों की जिम्मेदारी सिर्फ राजनीतिक संबंध संभालना नहीं होगी. उनके ये काम भी होंगे.

व्यापार बढ़ाने की कोशिश

नेपाल के नागरिकों के हितों की रक्षा करनी होगी. विदेशी निवेश और व्यापार बढ़ाने की कोशिश करनी होगी. पर्यटन को बढ़ावा देना होगा. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेपाल का पक्ष रखना होगा. विदेशों में रहने वाले नेपाली समुदाय से संपर्क बनाए रखना होगा. संकट में फंसे नेपाली नागरिकों की मदद करनी होगी. अब तक नेपाल में राजदूत पदों का बंटवारा लगभग आधा राजनीतिक नियुक्तियों और आधा करियर डिप्लोमैट्स के बीच होता रहा है.

राजनीतिक प्रभाव के आरोप

अक्सर इन नियुक्तियों को लेकर पक्षपात और राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगते रहे हैं. नई सरकार मेरिट आधारित नियुक्तियों और खुली प्रतिस्पर्धा की बात कर रही है. इसी के तहत पहली बार यह प्रक्रिया शुरू की गई है. हालांकि अंतिम फैसला अभी भी पूरी तरह सरकार के हाथ में रहेगा. विदेश मंत्रालय सिर्फ शुरुआती स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग करेगा. अंतिम नियुक्ति कैबिनेट की मंजूरी और संबंधित देश की सहमति मिलने के बाद ही होगी.

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