नेपाल में भ्रष्टाचार पर बडी कार्रवाई, भूटानी शरणार्थी घोटाले में दो मंत्रियों समेत 16 को जेल की सजा

Kathmandu: नेपाल की एक अदालत ने चर्चित फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाले में बड़ा फैसला सुनाया है. इसमें दो पूर्व मंत्रियों समेत 16 लोगों को दोषी ठहराया गया है. अदालत ने पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री टोप बहादुर रायमाझी को चार साल और पूर्व गृह मंत्री बाल कृष्ण खांड को दो साल की जेल की सजा सुनाई है. दोनों पर नेपाली नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए भूटानी शरणार्थी बताकर अमेरिका भेजने की साजिश में शामिल होने का आरोप था.

कितने नेपाली नागरिक अमेरिका भेजे 

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए कितने नेपाली नागरिक वास्तव में अमेरिका भेजे गए. हालांकि, जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं. नेपाल में पिछले वर्ष भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के बाद सरकार बदल गई थी. नई सरकार ने भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का वादा किया है और यह फैसला उसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है. यह घोटाला वर्ष 2023 में सामने आया था.

भूटान से आए शरणार्थी दिखाया

जांच में खुलासा हुआ कि कुछ नेपाली नागरिकों को फर्जी दस्तावेज तैयार कर भूटान से आए शरणार्थी दिखाया गया, ताकि उन्हें संयुक्त राष्ट्र के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में बसाया जा सके. जिला अदालत ने पूर्व उपप्रधानमंत्री टोप बहादुर रायमाझी को राज्य के खिलाफ अपराध, धोखाधड़ी और संगठित अपराध के आरोप में 4 साल की जेल सुनाई. पूर्व गृह मंत्री बाल कृष्ण खांड को सहयोगी की भूमिका के लिए 2 साल की जेल की सजा दी.

14 अन्य लोगों को भी चार साल तक की सजा

इसके अलावा गृह मंत्रालय के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी और एक पूर्व भूटानी शरणार्थी नेता सहित 14 अन्य लोगों को भी चार साल तक की सजा सुनाई गई. रायमाझी के वकील धर्मराज रेग्मी ने कहा कि उनके मुवक्किल शरणार्थी नीति बनाने में शामिल नहीं थे और वे फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेंगे. बाल कृष्ण खांड के वकील पंकज कर्ण ने भी फैसले को चुनौती देने की घोषणा की है.

करीब 1.20 लाख लोग नेपाल पहुंचे

1990 के दशक की शुरुआत में भूटान से नेपाली मूल के करीब 1.20 लाख लोग नेपाल पहुंचे थे. बाद में नेपाल और भूटान के बीच समझौता न होने पर संयुक्त राष्ट्र के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत करीब 1.13 लाख शरणार्थियों को अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में बसाया गया. इनमें से लगभग 1 लाख शरणार्थियों को अमेरिका ने शरण दी थी, जबकि अब भी हजारों लोग नेपाल के पूर्वी हिस्से के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.

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