नेपाल और इंडोनेशिया में लगे भूकंप के तेज झटके, दोनों देशों में दहशत, घरों, दफ्तरों से बाहर भागे लोग

New Delhi: नेपाल और इंडोनेशिया में बुधवार को भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई. झटके महसूस होते ही लोग एहतियातन घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए. हालांकि दोनों ही जगह किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है. नेपाल के कर्णाली प्रांत के मुगु जिले में तड़के 2:22 बजे भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.0 मापी गई. भूकंप का केंद्र धैनाकोट क्षेत्र में था.

कालिकोट में भी महसूस किए गए झटके

इसके झटके हुम्ला, जुम्ला और कालिकोट जैसे आस-पास के जिलों में भी महसूस किए गए. वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया के सुलावेसी क्षेत्र में दोपहर 1:01 बजे के करीब 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसका केंद्र मियांगस के पास बताया गया है. इसकी गहराई लगभग 58 किलोमीटर थी, जिसे मध्यम गहराई का भूकंप माना जाता है. भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में थोड़ा अंतर देखने को मिला.

किसी बड़े जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं

कुछ संस्थानों ने इसे 4.6 बताया, जबकि European-Mediterranean Seismological Centre ने इसकी तीव्रता 3.3 दर्ज की. दोनों देशों में फिलहाल किसी बड़े जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन सतर्क है और स्थिति पर नजर रखे हुए है. इंडोनेशिया पैसिफिक “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जबकि नेपाल भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव वाले क्षेत्र में है. इसलिए अक्सर इन दोनों देशों मे भूकंप आते रहते हैं.

पृथ्वी की सतह के नीचे अत्यधिक तनाव

नेपाल दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक पर स्थित है, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट प्रति वर्ष लगभग 5 सेमी की दर से उत्तर की ओर यूरेशियन प्लेट को धकेलती है. यह हलचल न केवल हिमालय के पहाड़ों को ऊपर उठाती है, बल्कि पृथ्वी की सतह के नीचे अत्यधिक तनाव भी पैदा करती है.

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राज्यसभा सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने अटल शताब्दी वर्ष के अवसर पर लखनऊ के संत सुदर्शनपुरी स्थित नगर निगम कल्याण मंडप के ₹2.50 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय विकास और जनसुविधाओं को नई दिशा देगी.

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