जेन-जी आंदोलन के बाद नेपाल में राजनीतिक बदलाव, अमेरिका को भी मिल सकते हैं बड़े अवसर

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Nepal Politics: नेपाल में 5 मार्च को चुनाव होना है, जिसे लेकर जोरो शोरों से तैयारियां की जा रही है. चुनाव के मद्देनजर सुरक्षा तैयारियों में भारत सरकार की ओर से भी मदद भेजी जा रही है. इसी बीच ट्रंप सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वहां हाल की राजनीतिक उथल-पुथल पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक बदलाव की एक बड़ी लहर का हिस्सा है.

दक्षिण और मध्य एशिया पर हाउस सब-कमेटी की सुनवाई के दौरान, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने कहा कि वॉशिंगटन महीनों की अशांति के बाद नेपाल की अगली सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है.

लोकतांत्रिक भागीदारी का अवसर

इस इलाके में दूसरी जगहों पर हो रहे लोकतांत्रिक विकास का जिक्र करते हुए कहा कि “नेपाल के लिए हमारा अप्रोच ऐसा ही है. ये दोनों ही यूथ मूवमेंट के उदाहरण हैं, जो पुरानी सरकारों को हटा रहे हैं और अब अपने देश में लोकतांत्रिक भागीदारी का अवसर बना रहे हैं.”

जेन-जी आंदोलन के चलते पीएम को देना पड़ा इस्‍तीफा

बता दें, सितंबर 2025 में नेपाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के विरुद्ध जेन-जी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. जेन-जी आंदोलन की वजह से प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और अगले महीने नए चुनाव के लिए स्टेज तैयार हुआ.

सुरक्षित और शांतिपूर्ण चुनाव की उम्‍मीद

कपूर ने कहा कि वॉशिंगटन एक आसान प्रक्रिया की उम्मीद करता है. नेपाल के साथ, हमें यह भी भरोसा है कि एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया होगी और जो भी जीतेगा, हम उसके साथ काम करने के लिए तैयार हैं.

नेपाल बांग्लादेश में हुए बदलाव स्ट्रेटेजिक टर्निंग पॉइंट

सब-कमेटी चेयर बिल हुइज़ेंगा ने नेपाल और पड़ोसी बांग्लादेश में हुए बदलावों को स्ट्रेटेजिक टर्निंग पॉइंट बताया. उन्होंने कहा कि “ये दोनों उदाहरण दक्षिण एशिया में जुड़ाव के लिए नए अध्याय की शुरुआत हैं. इन नई सरकारों के साथ अमेरिका के संबंधों को परिभाषित करना है.”

डेमोक्रेटिक रैंकिंग मेंबर सिडनी कामलागर-डोव ने बड़े राजनीतिक बदलावों को मौके की तरह बताया. उन्होंने कहा कि “ये बड़े राजनीतिक बदलाव अमेरिका के लिए एक बहुत कम मिलने वाला मौका देते हैं. वह मौका ये है कि वह जवाबदेह सरकारी शासन के लिए बढ़ती क्षेत्रीय मांग का समर्थन करने के लिए हमारी लोकतांत्रिक मदद का रणनीतिक तरीके से फायदा उठाए.”

चर्चा में दोनों पार्टियों की इस बात को माना गया कि नेपाल, जो रणनीतिक रूप से भारत और चीन के बीच स्थित है, एक सेंसिटिव जियोपॉलिटिकल स्थिति में है.

कपूर ने दक्षिण एशिया और अमेरिका का भी किया जिक्र

कपूर ने पहले इस बात पर जोर दिया था कि दक्षिण एशिया में किसी एक ताकत के दबदबे को रोकना अमेरिका का मुख्य मकसद है. उन्होंने कहा, “दक्षिण एशिया पर हावी होने वाली कोई दुश्मन ताकत दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकती है.”

जिस तरह से अमेरिकी सांसदों ने चर्चा में अपना पक्ष रखा है, इससे एक बात साफ है कि वॉशिंगटन नेपाल के राजनीतिक बदलाव को न केवल एक घरेलू लोकतांत्रिक विकास के रूप में देखता है बल्कि दक्षिण एशिया को आकार देने वाले बड़े रणनीतिक मुकाबले के हिस्से के रूप में भी देखता है.

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