NSR को लेकर पुतिन ने मांगा भारत-चीन का साथ, कहा चल रही बात, जानिए ये रूट क्यो है इतना खास?

Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Must Read
Aarti Kushwaha
Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
NSR India-China: भारत और चीन के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए सबसे पहले जिस वैश्विक नेता ने पहल की थी, वो थे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. उन्होंने एक बार फिर गलवान के बाद ठंडे पड़े भारत-चीन के संबंध को फिर से ठीक करने के लिए दोनों नेताओं को साथ बिठाया और एक प्रोजेक्ट में दोनों को साथ लाना चाहते हैं.
दरअसल, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि भारत उन देशों में शामिल है, जो नॉर्दर्न सी रूट (NSR) के माध्यम से रूस के साथ सहयोग में बढ़ती दिलचस्पी दिखा रहे हैं. बता दें कि रूस इस रूट पर चीन के साथ मिलकर काम कर रहा है, जो आर्कटिक महासागर से गुजरने वाला समुद्री रास्ता होगा.

रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण ये योजना

दरअसल, रूस की ये योजना भविष्य की आर्थिक और रणनीतिक योजनाओं में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वो इस रूट को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के एक बड़े मार्ग के रूप में विकसित करना चाहता है, जिसमें सिक्योरिटी का रिस्क कम होगा. इस दौरान पुतिन ने चीन और भारत को उन देशों में शामिल बताया है, जो NSR को लेकर रूस के साथ बातचीत कर रहे हैं. बता दें कि भारत, रूस से ऊर्जा का एक बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं. इसके अलावा रूस के लिए भारत की भागीदारी का एक रणनीतिक पहलू भी है.
बता दें कि रूसी सुदूर पूर्व और आर्कटिक क्षेत्र में चीन की आर्थिक मौजूदगी लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में भारत को इस क्षेत्र के विकास में जोड़ना रूस के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भरता को संतुलित करने का एक तरीका भी हो सकता है.

क्या है नॉर्दर्न सी रूट?

आपको बता दें कि नॉर्दर्न सी रूट रूस के आर्कटिक तट के साथ चलता है और आर्कटिक महासागर के जरिए अटलांटिक तथा प्रशांत महासागरों को जोड़ता है. साफ शब्दों में कहे तो यह यूरोप और एशिया के बीच समुद्री आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक रास्ता है. आज यूरोप और एशिया के बीच बड़े पैमाने पर माल की आवाजाही स्वेज नहर के रास्ते होती है.ऐसे में NSR इस पारंपरिक मार्ग की तुलना में काफी छोटा पड़ सकता है. इससे कई यात्राओं में करीब 10 से 14 दिन तक का समय बचने की संभावना है. यही कारण है कि रूस इसे भविष्य के महत्वपूर्ण व्यापारिक कॉरिडोर के रूप में देख रहा है.
NSR रूस के लिए केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ाने का जरिया भी है. दरअसल, आर्कटिक क्षेत्र में रूस के पास तेल, गैस और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों के बड़े भंडार हैं. ऐसे में बेहतर समुद्री कनेक्टिविटी से इन संसाधनों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा. इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और रूस के साथ व्यापारिक तनाव ने मॉस्को को एशियाई देशों के साथ अपने आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है. ऐसे में चीन और भारत जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए NSR रूस के लिए खास महत्व रखता है.
Latest News

250 दिन से समंदर में अमेरिकी सैनिक… सुसाइड की कोशिशों के बीच अब अमेरिका ने ईरान के पास भेजा नया युद्धपोत

US Army Suicide Attempt: ईरानी जंग के खिलाफ अमेरिका के सबसे अहम युद्धपोतों में शामिल यूएसएस अब्राहम लिंकन 250...

More Articles Like This