पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बिगड़े रिश्ते, इस्लामाबाद ने काबुल को धमकाया…

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Pak-Afghan Peace Talk : बीते कुछ दिनों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच कतर की राजधानी दोहा में हुई शांति वार्ता में कथित तौर पर गतिरोध पैदा हो गया है, प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इस्लामाबाद ने तालिबान पर आतंकवाद-रोधी प्रयासों में सहयोग करने के अलावा सुरक्षा मुद्दों पर अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया है.

जानकारी देते हुए बता दें कि तुर्किये की राजधानी इस्तांबुल में दूसरे दौर की वार्ता हुई, जो कि 16 अक्टूबर के युद्धविराम को देखते हुए आयोजित की गई. बता दें कि 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद से दोनों पक्षों के बीच के सबसे घातक संघर्ष को समाप्त कर दिया था.

तालिबान पर पाकिस्तान ने लगाए आरोप

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने सीमापार आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए तालिबान के समक्ष स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित मांगें रखी हैं, लेकिन ये भी कहा गया कि इस्लामी समूह की अतार्किक दलीलों ने उनके सहयोग करने की इच्छा पर गंभीर संदेह पैदा किया है.

राजनीतिक संबंध बनाने की संभावना पर भी बात

इसके साथ ही पाकि‍स्‍तान ने ये भी बताया कि दूसरे दौर की वार्ता में सीमापार आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए एक संयुक्त निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया गया. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों के बीच चर्चा में दीर्घकालिक राजनीतिक समझ बनाने की संभावना पर भी बात हुई.

आतंकवादियों को आश्रय देना अस्वीकार्य

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि तालिबान सहयोग करने या जमीनी हक़ीकतों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. इतना ही नही बल्कि ये भी कहा गया कि तुर्किये तालिबान प्रतिनिधिमंडल को पाक की चिंताओं को समझाने में मदद करने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उसके क्षेत्र को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को किसी भी तरह का आश्रय देना अस्वीकार्य होगा.

रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने दी चेतावनी

ऐसे में दूसरे दौर की वार्ता शुरू होते ही रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी और कहा कि अगर शांति वार्ता की बात नही बनती तो तालिबान के साथ युद्ध छिड़ जाएगा. इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सीमा पर कोई झड़प नहीं हुई है और दोहा में पहले दौर की वार्ता में जिन 80 प्रतिशत बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उनका कहना है कि उन पर पहले ही अमल किया जा चुका है.

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