‘ना कोई ठोस एजेंडा ना ही विजन…’, बोर्ड ऑफ पीस में यूं ही मुंह उठाकर पहुंचा पाकिस्तान

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Pakistan Agenda Less In Board Of Peace : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी है. बता दें कि यहां पीएम शहबाज शरीफ की बेइज्जती का वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि पाकिस्तान का इस बोर्ड में क्या योगदान है, पाकिस्तान का क्या प्लान है और पाकिस्तान ने जो कमिटमेंट किए हैं वो पूरे करेगा या नहीं. फिलहाल, इन सवालों का जो जवाब मिला है उससे यही समझ आता है कि पाकिस्तान के पास ना तो ठोस कोई एजेंडा है और ना ही कोई विजन.

बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान की हैसियत

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान के इस मंच पर आने के बाद उसकी हैसियत स्‍पष्‍ट है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम वहां खुद को बेहद असहज और अलग-थलग महसूस कर रहे थे. इतना ही नही बल्कि दुनिया के बडे़ लीडर्स उन्हें भाव तक नहीं दे रहे थे. इसके साथ ही ग्रुप फोटो के दौरान शहबाज शरीफ को बीच की जगह तक नहीं मिली. बता दें कि इसमें डोनाल्ड ट्रंप के ठीक पीछे सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर जैसे देशों के नेता खड़े थे वहीं शरीफ भीड़ में एक तरफ कोना पकड़े नजर आए.

शर्मिंदगी का सामना कर रहा पाकिस्‍तान

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार बोर्ड ऑफ पीस चाहता है कि सदस्य देश गाजा में शांति सेना के लिए अपने जवान भेजे और आर्थिक सहयोग भी करें. इसके साथ ही पाकिस्‍तान को लेकर इंडोनेशिया समेत और भी कई देशों ने अपना रुख साफ कर दिया है. लेकिन, पाकिस्तान वादा करने के बाद अब पीछे हटता हुआ नजर आ रहा है. इससे स्‍पष्‍ट है कि शरीफ का मुल्क ना तो डॉलर दे सकता है और ना ही सेना भेजना चाहता है. ऐसे में पाकिस्तान का जो हाथ सेना के बल पर भरा हुआ नजर आ रहा था यहां आकर खाली दिखा. इस दौरान कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के इसी दोगलेपन की वजह से शरीफ को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है.

शहबाज की सिर्फ औपचारिक मौजूदगी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी, महंगाई, आर्थिक संकट से बेहाल पाकिस्तान ने बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में सिर्फ अपनी मौजूदगी ही दर्ज कराई है. ऐसे में कहा जा रहा है कि उन्‍होंने दिया तो कुछ नही लेंकिन क्‍या पता मौके का फायदा उठाते हुए किसी मुल्क से कुछ मांग लिया हो. ये भी उम्‍मीद जताई जा रही है कि शरीफ साहब इसी मकसद से अमेरिका आए हैं. पाकिस्तान के बेइज्जती शब्द सबसे उपयुक्त है जो उसे शायद ही कभी महसूस होती है.  लेकिन ट्रंप ने शरीफ की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि ‘I like this guy’, इससे शायद उन्‍हें थोड़ी राहत मिली हो.

बोर्ड ऑफ पीस में इन देशों ने की योगदान की घोषणा

  • बोर्ड ऑफ पीस में अमेरिका ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने का वादा किया है.
  • फीफा (FIFA): गाजा में फुटबॉल से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 5 करोड़ डॉलर.
  • संयुक्त राष्ट्र (UN): मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर.
  • इसके साथ ही और भी कई मुस्लिम बहुल देशों ने भी गाजा के लिए आर्थिक मदद और सैनिक मुहैया कराने की पेशकश की है.
  • कतर, सऊदी अरब और यूएई प्रत्येक ने कम से कम 1-1 अरब डॉलर का वादा किया है.
  • सैनिक भेजने वाले देश: मोरक्को, अल्बानिया, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और कोसोवो.
  • इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) को कुल 20,000 सैनिकों की आवश्यकता है.
  • ISF के अमेरिकी कमांडर मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स होंगे और उनका डिप्टी एक इंडोनेशियाई अधिकारी होगा.
  • इंडोनेशिया की बड़ी भूमिका: दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने 8000 सैनिक भेजने की घोषणा की है.
  • सैनिक भेजने वाले देशों में पाकिस्तान का नाम नहीं है.

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