पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान में गहराया मानवीय संकट, महिलाओं और छात्रों की भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शन से समाज में असंतोष 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Pakistan economic crisis: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में आवश्यक सेवाओं की कमी के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई, बेरोजगारी, खाद्य असुरक्षा और बिजली संकट जैसी समस्याएं राजनीतिक उपेक्षा और सुरक्षा-आधारित प्रशासन के साथ मिलकर हालात को और गंभीर बना रही हैं.

यूके स्थित अखबार ‘एशियन लाइट’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में महिलाओं और छात्रों की बढ़ती भागीदारी वाले विरोध प्रदर्शन समाज में गहरे असंतोष का संकेत हैं, जो लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक उपेक्षा से जुड़ा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि बिजली की भारी कमी और बढ़े हुए बिल यहां के लोगों के लिए सालभर की समस्या बन गए हैं. विडंबना यह है कि बड़े जलविद्युत परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों को लंबी कटौती झेलनी पड़ती है और उनसे वाणिज्यिक दरों पर शुल्क वसूला जाता है.

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हालात इतने बिगड़ गए कि विरोध प्रदर्शन क्षेत्रव्यापी बंद में बदल गए. प्रदर्शनकारियों ने महंगे बिजली बिल, बकाया वेतन और नागरिक अधिकारों में कटौती का हवाला देते हुए बिल भरने से इनकार कर दिया. इसके जवाब में प्रशासन ने कई बार गिरफ्तारियां, संचार बंदी और बल प्रयोग का सहारा लिया. वहीं, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में जमीन के मालिकाना हक का मुद्दा बड़ा विवाद बनकर उभरा है. बड़ी मात्रा में जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किए जाने से स्थानीय लोगों को अपने पुश्तैनी अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है.

जमीन कब्जाने से लोगों में नाराजगी

बुनियादी ढांचा और रणनीतिक परियोजनाओं के नाम पर जमीन कब्जाने और बिना मुआवजे विस्थापन के आरोपों ने लोगों में नाराजगी बढ़ाई है. रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में उत्पादित बिजली पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड में जाती है, जबकि स्थानीय लोग बिजली संकट और महंगे टैरिफ से जूझ रहे हैं. इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि क्षेत्र के संसाधनों का उपयोग बाहरी हितों के लिए किया जा रहा है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आलोचकों का आरोप है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां, खासकर आईएसआई, समस्याओं के समाधान के बजाय विरोध को दबाने पर ज्यादा ध्यान देती हैं. निगरानी, डराने-धमकाने और जबरन गायब किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लाेगाें का ध्यान खींच रहा यह मुद्दा 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा धीरे-धीरे ध्यान खींच रहा है. 2025 में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के कार्यकर्ताओं ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध पर पाबंदियों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी.

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अक्सर विरोध प्रदर्शनों को “बाहरी प्रभाव” का परिणाम बताया है, जबकि स्थानीय लोग लगातार आर्थिक और मानवीय समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं.

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