दुनिया में सबसे निचले स्तर पर पाकिस्तान की महिला श्रम भागीदारी, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Pakistan Female Labour Force : पाकिस्तान में महिला श्रमबल भागीदारी (फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन) दुनिया में सबसे कम स्तर पर बनी हुई है. इसकी वजह यह है कि गहरी जड़ें जमाए सांस्कृतिक मान्यताएं, संस्थागत कमजोरियां और संरचनात्मक असमानताएं हैं. प्राप्‍त जानकारी के अनुसार यह बात एथेंस स्थित थिंक टैंक डायरेक्टस की एक रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट का कहना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक सुधारों की जरूरत है. इसमें श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, सुरक्षित परिवहन, डिजिटल और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना. इसके साथ ही महिलाओं की आवाजाही व स्वायत्तता पर रोक लगाने वाली भेदभावपूर्ण सामाजिक सोच को खत्म करना शामिल है.

इस्लामाबाद में महिलाओं की श्रम भागीदारी प्रतिशत

जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि लक्षित हस्तक्षेप नहीं किए गए तो यह असमानताएं गरीबी और अविकास के चक्र को और मजबूत करेंगी, जिसकी वजह से पाकिस्तान की लगभग आधी आबादी की आर्थिक क्षमता हाशिये पर ही रह जाएगी. डायरेक्टस की रिपोर्ट का कहना है कि 15 से 64 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में पाकिस्तान की फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन दर मात्र 22.6 प्रतिशत है, इसके साथ ही राजधानी इस्लामाबाद में महिलाओं की श्रम भागीदारी केवल 22.5 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की भागीदारी 67 प्रतिशत तक है.

महिलाओं को चुनौतियों का करना पड़ता है सामना

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार शहरी महिलाओं को भी सीमित आवाजाही, सामाजिक दबाव और पारिवारिक सहयोग की कमी जैसी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से उनके लिए कामकाजी जीवन में प्रवेश करना मुश्किल हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, संरचनात्मक असमानताओं और गहरी जमी सामाजिक मान्यताओं का मेल इन विषमताओं को बढ़ाता है. साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि आर्थिक और राजनीतिक बहिष्कार के साथ-साथ पाकिस्तानी महिलाओं को सामाजिक और सुरक्षा संबंधी बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है. विशेष रूप से राजनीति, मीडिया और सामाजिक सक्रियता से जुड़ी महिलाओं को लैंगिक हिंसा, उत्पीड़न और चरित्र हनन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

महिलाओं के डराने-धमकाने के झेलने पड़ते हैं अभियान

इतना ही नही बल्कि महिला राजनेताओं और पत्रकारों को अक्सर डराने-धमकाने और बदनाम करने के अभियान झेलने पड़ते हैं, ताकि वो कहीं भी किसी भी हिस्‍सा न लें पाएं और उनकी भागीदारी को कमजोर किया जा सके. इस प्रकार के शत्रुतापूर्ण माहौल महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में आने से हतोत्साहित करने के साथ महिला नेतृत्व और स्वायत्तता पर सवाल खड़े करने वाली सोच को भी मजबूत करते हैं.

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