निष्काम भक्ति से होती है प्रभु की प्राप्ति : दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान की वन लीला में केवट प्रसंग एवं भरत चरित की कथा का वर्णन किया गया। भगवान की प्रत्येक लीला में भगवान की इच्छा ही प्रधान है। कहते हैं बाल लीला के समय महारानी कैकेई से भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के लिए वरदान मांगा था। भगवान ने सारी बात मां कैकेई को बताया कि- धर्म की रक्षा करने के लिए और अधर्म को मिटाने के लिए हम चारो भाइयों का अवतार हुआ है।
मां महाराज दशरथ मुझे राजा बनना चाहेंगे उस समय आप मेरे लिए वनवास और भारत जी के लिए राज्य मांगना। महारानी कैकेई ने वरदान दे दिया। उसके बाद थोड़ा भगवान से दूरी बनाने लगी, ताकि भगवान की इच्छा पूर्ण की जा सके। भगवान के वनवास में भी भगवान की ही इच्छा प्रधान है। वन यात्रा में केवट प्रसंग की लीला हुई है, श्री गंगा जी पार करने के लिए भगवान केवट के नाव पर विराजमान हुए। निष्काम भक्ति से प्रभु की प्राप्ति होती है। नाव वाले केवट की निष्काम भक्ति थी, इसी से भगवान इतना अधिक रीझ गये।
बहुत कीन्ह प्रभु लखन सिय नहिं कछु केवट लेई।
विदा कीन्ह करूणायतन भगति विमल वर देई।।
भरत चरित में श्री भरत लाल जी समस्त अयोध्या वासियों को साथ लेकर चित्रकूट पधारे। उधर श्रीधाम जनकपुर से महाराज जनक विशाल समाज लेकर चित्रकूट आये। भगवान श्री राम की कुटिया के एक तरफ अयोध्या दूसरी तरफ जनकपुर वासियों का शिविर लगा। यह सिद्ध हो गया कि जहां श्री सीताराम जी हैं वही अयोध्या है और वही जनकपुर है।
जहां राम तहां अवध निवासू। तहंई दिवस जहां भानू प्रकाशू।।
श्री भरत चरित की फलश्रुति कहते हुए पूज्य गोस्वामी जी कहते हैं कि- जो भरत चरित की कथा को आदर पूर्वक सुनेंगे अथवा पढ़ेंगे, उन्हें भगवान श्री सीताराम जी के चरणों में प्रेम की प्राप्ति होगी और उनका मन माया मोह से हट जायेगा।
भरत चरित को नेम तुलसी जो सादर सुनहिं।
सीय राम पद प्रेम अवसि  होइ भव रस विरति।।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।

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