Islamabad: पाकिस्तान के पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद विवादों में घिर गए हैं. एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के समर्थन में बयान दिया और भारत के खिलाफ धमकी भरी बातें भी कहीं. कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें शेख राशिद के साथ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे कुछ लोग मंच पर नजर आ रहे हैं. कार्यक्रम में बोलते हुए राशिद ने हाफिज सईद की तारीफ की और खुद को उसका ‘गुलाम’ तक कह डाला.
भारत के खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल
उन्होंने दावा किया कि सईद का नंबर उनके मोबाइल में मिलने के बाद उन्हें अमेरिका से वापस भेज दिया गया था. शेख राशिद ने न सिर्फ हाफिज सईद को लेकर अपनी निष्ठा जताई बल्कि भारत के खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान की तरफ देखने की भी कोशिश की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली टिप्पणी करते हुए भारत के भविष्य को लेकर भी धमकी दी.
हाफिज सईद के साथ खड़े होने की बात
राशिद ने पाकिस्तान और हाफिज सईद के साथ खड़े होने की बात कही और बेशर्मी से इस पर मुस्कुराते रहे. उनके इस बयान के बाद एक बार फिर पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों के प्रति राजनीतिक समर्थन और ऐसे बयानों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. शेख राशिद अवामी मुस्लिम लीग के संस्थापक हैं. वह इमरान खान की सरकार में 2020 से 2022 तक पाकिस्तान के गृह मंत्री रहे थे. उनके राजनीतिक करियर के दौरान भारत-पाकिस्तान संबंधों और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर उनके कई तीखे बयान सामने आते रहे हैं.
हाफिज सईद आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड
उन्होंने एक बार तो भारत को पावभर के एटम बम वाली धमकी भी दे डाली थी. हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा नाम के आतंकी संगठन का कर्ता-धर्ता है. भारत लंबे समय से उसे मुंबई समेत कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड बताता रहा है. 2008 के मुंबई हमलों में 166 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, इसका भी मास्टरमाइंड यही था. संयुक्त राष्ट्र ने भी हाफिज सईद को प्रतिबंधित आतंकवादी सूची में रखा है.
पूर्व मंत्री का सार्वजनिक मंच से बयान देना बेहद खतरनाक
ऐसे व्यक्ति के समर्थन में किसी पूर्व मंत्री का सार्वजनिक मंच से बयान देना बेहद खतरनाक है. खासकर तब, जब दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही बेहद तनावपूर्ण रहे हैं. ये बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद अविश्वास को और बढ़ाने वाला है, हालांकि इस बयान को पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना जा सकता.
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