पाकिस्तान की मस्जिद में आत्मघाती हमला, 15 लोगों की मौत, विस्फोट के बाद इलाके में मची अफरा-तफरी

Islamabad: पाकिस्तान के खैबर पख्तुनखां प्रांत की एक मस्जिद में भीषण विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई है. कई अन्य लोग बुरी तरह घायल हुए हैं. विस्फोट प्रांत के कोहट जिले में ओल्ड पुलिस लाइन के पास हुआ. अभी तक इस विस्फोट की किसी गुट ने जिम्मेदारी नहीं ली है. सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और हमले के बाद तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. खैबर पख्तुनखां की 1122 रेस्क्यू टीम के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजल ने बताया कि बचाव कर्मी मौके पर पहुंच गए हैं.

इलाके में अफरा-तफरी

इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं. उन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान के खैबर पख्तुनखां और बलूचिस्तान में हथियारबंद संगठनों की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं. खैबर पख्तुनखां के पुलिस महानिरीक्षक जुल्फिकार हमीद ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक विस्फोटक से लदे एक वाहन को ओल्ड पुलिस लाइंस के पास टक्कर मारकर विस्फोट किया गया. विस्फोट के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. पुलिस और हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी भी शुरू हो गई.

गोलीबारी की घटना की जारी

पुलिस महानिरीक्षक के मुताबिक गोलीबारी की घटना की जानकारी सामने आने तक जारी थी. सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और हमले के बाद तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि मस्जिद में मौजूद लोगों को निशाना बनाकर हमला किया गया या इसका मुख्य निशाना आसपास मौजूद पुलिस प्रतिष्ठान था. क्योंकि विस्फोट ओल्ड पुलिस लाइंस के पास हुआ है, इसलिए जांच एजेंसियां हमले के पूरे घटनाक्रम और लक्ष्य की जांच कर रही हैं.

अभी तक किसी भी संगठन ने नहीं ली हमले की जिम्मेदारी 

किसी भी संगठन ने अभी तक हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. ऐसे में हमलावरों और हमले के पीछे के संगठन को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. पिछले एक साल में इन इलाकों में सुरक्षाबलों और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई हमले हुए हैं. खैबर पख्तुनखां में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तानी राज्य के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है. उसका घोषित उद्देश्य पाकिस्तान की मौजूदा शासन व्यवस्था को हटाकर शरिया आधारित व्यवस्था स्थापित करना है. वहीं बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन अलगाव और आत्मनिर्णय की मांग को लेकर हथियारबंद संघर्ष कर रहे हैं.

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