Pakistan Gaza Board Of Peace Reaction: पाकिस्तान जहां गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हो गया है, वहीं उसके देश में ही इसे लेकर विरोध हो रहा है. देश के पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का तो ये भी कहना है कि पाकिस्तान इसमें शामिल होकर गलती कर रहा है. उसे उन लोगों के साथ नहीं होना चाहिए, जिन्होंने मुस्लिमों को मारा है. गाजा बोर्ड ऑफ पीस, डोनाल्ड ट्रंप की एक पहल है, जो इजरायल-हमास के बीच हुए युद्धविराम का दूसरा चरण है.
हमास का निरस्त्रीकरण और गाजा में पुनर्निर्माण का काम
इसके तहत हमास का निरस्त्रीकरण और गाजा में पुनर्निर्माण का काम होना है. हमास के हथियार डलवाने और गाजा में शांति के लिए एक स्टैबिलाइजेशन फोर्स भी बननी है, जिसका हिस्सा ट्रंप पाकिस्तान को बनाना चाहते थे. फिलहाल इजरायल ने खुद ही इसके लिए लगभग मना कर दिया है, लेकिन मुद्दा ये है कि फिलिस्तीन की मांग करने वाला पाकिस्तान कहीं न कहीं इजरायल के पाले में खड़ा हो गया है.
अमेरिका से अपने हित साधने में जुटा है पाकिस्तान
ऐसे में उसके अपने देश में ये सवाल उठ रहे हैं कि मुस्लिमों को मारने वाले इजरायल को पाकिस्तान मान्यता कैसे दे रहा है? पाकिस्तान इस वक्त सिर्फ वही कर रहा है जो डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं. हालांकि ये रिश्ता कुछ ऐसा हो गया है कि अमेरिका, पाकिस्तान से अपने हित साधने में जुटा है, जबकि पाकिस्तान उससे अपना फायदा निकाल रहा है. पहले तो भारत के खिलाफ लॉबी बनाने के चक्कर में पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पांवों में लोटता रहा, अब वो अपने आका को खुश करने के चक्कर में अपने ही देश में कलह मचा चुका है.
पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर भी खूब बहस
जब से शहबाज शरीफ ने गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने की हामी भरी है. इस पर पाकिस्तानी टीवी चैनलों पर भी खूब बहस हो रही है कि क्या ये बोर्ड कश्मीर के मुद्दे को उठाने का मंच बनेगा. जैसे ही ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने का न्यौता दुनिया के तमाम देशों को भेजा, वैसे ही ये पाकिस्तान को लगा कि ये उसके लिए एक मौका है. पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पीस बोर्ड में शामिल होने से देश का कोई खास फायदा नहीं है बल्कि नुकसान ही है.
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