UAE on Iran America Relations: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने स्पष्ट कर दिया है कि वो अपने हवाई क्षेत्र, जमीन या समुद्री इलाकों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा.
दरअसल, यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश तटस्थ बना रहेगा और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं, दूसरी तरफ ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर में सेंटकॉम (CENTCOM) के समुद्री क्षेत्र में पहुंच चुका है.
ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार नहीं…
इसी बीच, अमेरिका के एक ड्रोन विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि ईरान के ड्रोन स्वार्म USS अब्राहम लिंकन और उसके साथ तैनात स्ट्राइक ग्रुप के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि USS अब्राहम लिंकन फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है.
US लगातार दे रहा वॉर्निंग
दरअसल, ईरान में लगातार बढ़ रहे है, जिसमें अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है. वहीं, ईरान में प्रदर्शन के दौरान हो रही मौतों के को लेकर अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है. हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि एक नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इसे इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
कतर-सऊदी ने US को रोका
ईरान पर अमेरिकी धमकी देने के बाद कतर, सऊदी अरब और ओमान ने अमेरिका को ईरान पर हमले से रोका. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव उस समय और तेज हो गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि जनवरी में ईरान में हुए प्रदर्शन दमन के दौरान करीब 20 हजार लोगों की मौत हुई थी, जिसे अब बढ़कर 30 हजार से ज्यादा माना जा रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इन कूटनीतिक प्रयासों में मिस्र भी शामिल था. वहीं, पाकिस्तानी अखबार डॉन ने ईरान में पाकिस्तान के राजदूत रजा अमीरी मोगद्दम के हवाले से बताया कि ट्रंप ने तेहरान को सूचित किया था कि अमेरिका हमला नहीं करेगा और उससे संयम बरतने को कहा था.
इसके अलावा, इजरायली मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने ट्रंप से ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के बजाय सीमित और लक्षित सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार करने को कहा था. इसी बीच चेतावनी दी गई कि बिना सोचे-समझे उठाया गया कोई भी कदम घोषित उद्देश्यों के उलट नतीजे दे सकता है और इससे ईरानी शासन को ही फायदा पहुंच सकता है.
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