New Delhi: भारत की सीमा और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के करीब पाकिस्तान बडी साजिश रच रहा है. भारतीय एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान से जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे के आसपास मस्जिदों और बड़े धार्मिक परिसरों का निर्माण और विस्तार किया जा रहा है. एजेंसियों ने ऐसे एक दर्जन से ज्यादा ठिकानों की पहचान की है जहां निर्माण गतिविधियां चल रही हैं. चिंता की बात यह है कि इन धार्मिक परिसरों के साथ-साथ इलाके में सैन्य ढांचे का भी विकास हो रहा है.
सैन्य लिहाज से संवेदनशील
अधिकारियों को आशंका है कि पाकिस्तान इन मस्जिद परिसरों का इस्तेमाल आतंकी संगठनों के लिए नए ठिकानों के तौर पर कर सकता है. इन निर्माण गतिविधियों की पहचान PoK को पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों से जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्गों पर हुई है. इनमें इस्लामाबाद-मुरी-मुजफ्फराबाद रोड से लेकर मुजफ्फराबाद-मानसेहरा-एबटाबाद मार्ग तक शामिल हैं. कुछ सड़कें सीधे LoC के करीब से गुजरती हैं और सैन्य लिहाज से संवेदनशील मानी जाती हैं.
अलग-अलग हिस्सों में बांट सकें
अधिकारियों का आकलन है कि इन परिसरों को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि आतंकी संगठन अपने ठिकानों को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकें. इससे उनके लोगों और सामान को एक जगह जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था. अब एजेंसियों को आशंका है कि उसी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अपने नेटवर्क को फैलाने की तैयारी शुरू कर दी है. भारतीय एजेंसियों ने जिन इलाकों में निर्माण गतिविधियों की जानकारी जुटाई है उनमें कई अहम सड़क मार्ग शामिल हैं.
PoK में दाखिल होने का प्रमुख रास्ता
इस्लामाबाद-मुरी-कोहाला-मुजफ्फराबाद रोड PoK में दाखिल होने का प्रमुख रास्ता है. वहीं मुजफ्फराबाद-मानसेहरा-एबटाबाद मार्ग इस क्षेत्र को खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ता है. इसके अलावा मुजफ्फराबाद से चकोठी की ओर जाने वाली सड़क LoC के करीब है. इसे सैन्य लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. दक्षिणी PoK में रावलाकोट-आजाद पट्टन, कोटली-कहूटा, मीरपुर-दीना और भीमबर-गुजरात जैसे सड़क मार्गों पर भी निर्माण की जानकारी मिली है. ये रास्ते PoK को रावलपिंडी, झेलम और गुजरात जिलों से जोड़ते हैं.
आवाजाही और सामान पहुंचाना आसान
अधिकारियों को शक है कि इन मस्जिद परिसरों में से कुछ का इस्तेमाल आतंकी संगठनों के उप-केंद्रों के रूप में किया जा सकता है. पहले आतंकी संगठन अपने लोगों और संसाधनों को बड़े और पहचाने जा चुके ठिकानों पर रखते थे. अब आशंका है कि इस व्यवस्था को बदलकर छोटे-छोटे केंद्र बनाए जा सकते हैं. इसका मकसद आतंकियों के कैडर, रसद और दूसरे जरूरी सामान को अलग-अलग जगहों पर फैलाना हो सकता है. मुख्य सड़कों के आसपास ऐसे ठिकाने होने से उनके बीच आवाजाही और सामान पहुंचाना आसान हो सकता है.
इसे भी पढ़ें. विरोध के बीच तुर्की की संसद से पाकिस्तान- सऊदी अरब के साथ हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को मिली मंजूरी