Pakistan Saifullah Kasuri: पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े शीर्ष नेतृत्व और मौलवियों के हालिया बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के सैन्य ढांचे और राजनीति के बीच दशकों से आतंकवादियों का कनेक्शन है. बहावलपुर में आयोजित एक जलसे में लश्कर-ए-तैयबा के पॉलिटिकल विंग के मौलाना मौलवी नसीर मदनी ने कहा कि हाफिज सईद ने दस हजार आतंकी जम्मू-कश्मीर में भेजे थे. यह जलसा 14 अगस्त को आयोजित किया गया था.
वहीं, लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्ला कसूरी ने खुलेआम दावा किया है कि पिछले 40 वर्षो से वह और हाफिज सईद पाकिस्तान के राजनीतिक शासकों और सैन्य नेतृत्व के सीधे संपर्क में रहे हैं. जिससे एक बार फिर सेना और मुजाहिद की मिलीभगत का खुलासा हो गया है.
सैफुल्ला कसूरी का बड़ा दावा
मौलवी मदनी के खुलासे के बाद लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्ला कसूरी का भी बयान सामने आया है. कसूरी ने सीधे तौर पर दावा किया है कि पिछले 40 वर्षो से वह और हाफिज सईद पाकिस्तान के शीर्ष राजनीतिक शासकों और सैन्य नेतृत्व जिसका मुख्यालय रावलपिंडी में स्थित है, उससे सीधे संपर्क में रहते हैं. कसूरी ने दावा किया है कि जब भी असैन्य या सैन्य नेतृत्व किसी निर्णय पर पीछे हटता या कोई और कदम उठाता है तो हाफिज सईद खुद उनसे मुलाकात करता था. जहां बैठकों के अलावा, भरोसेमंद प्रतिनिधियों के माध्यम से पत्र भेजकर शासन और सेना को निर्देश व सलाह दी जाती थी.
दोनों दावों से बड़ा खुलासा
इन दो बयानों से हाफिज सईद की आतंकी साजिशों का तो खुलासा हुआ ही है. साथ ही एक बार फिर आतंकियों की पहुंच पाकिस्तानी सेना में होने का दावा फिर मजबूत हुआ है. ऐसे में यह एक बड़ा खुलासा माना जा रहा है. इसके अलावा खुले बयानों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के उन दावों पर भी पानी फेरा है, जिसमें वह खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता रहा है.
बता दें कि पाकिस्तान हमेशा यह दावा करता रहा है कि वह खुद आतंकवाद से पीड़ित है. जबकि वह यह दावा भी करता है कि उसका सेना से कोई कनेक्शन नहीं है. लेकिन मौलाना मौलवी नसीर मदनी और सैफुल्ला कसूरी के बयानों से एक तरह से बड़ा खुलासा हुआ कि सेना का आतंकवादियों से भी सीधा कनेक्शन रहता है.