New Delhi: पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों को ऑपरेशनल स्पेस उपलब्ध करा रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है. चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान का मिडिल ईस्ट की ओर झुकाव मिसकैलकुलेशन, वैचारिक फैलाव और प्रॉक्सी उलझाव का जोखिम बढ़ा सकता है.
हमास, मुस्लिम ब्रदरहुड संगठनों को दे रहा मंच
यह दावा काबुल से सामने आई एक रिपोर्ट में किया गया है. Afghan Diaspora Network की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान हमास और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठनों को मंच दे रहा है, जिससे स्थानीय आतंकी संगठनों जैसे Lashkar-e-Taiba (LeT) और Jaish-e-Mohammad (JeM) को वैचारिक और नेटवर्क समर्थन मिल सकता है.
हमास प्रतिनिधि Khaled Qaddoumi की मेजबानी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही अंतर्राष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने LeT और JeM पर प्रतिबंध लगाए हों, लेकिन ये संगठन सहयोगी संस्थाओं और फ्रंट स्ट्रक्चर के जरिए सक्रिय बने हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने जनवरी 2024 में अपनी सीनेट में हमास प्रतिनिधि Khaled Qaddoumi की मेजबानी की.
धार्मिक व राजनीतिक हस्तियों से की मुलाकात
फरवरी 2025 में वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए और धार्मिक व राजनीतिक हस्तियों से मुलाकात की. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियां पाकिस्तान को केवल दक्षिण एशिया ही नहीं, बल्कि मध्य पूर्व के समीकरणों में भी एक विवादित भूमिका में ला रही हैं.
वैश्विक नैरेटिव हो सकता है और मजबूत
इसमें कहा गया है कि यदि हमास जैसे संगठनों को पाकिस्तान में राजनीतिक मंच मिलता है, तो इससे देश का आतंकी समर्थक राष्ट्र होने का वैश्विक नैरेटिव और मजबूत हो सकता है. हमास को अमेरिका और यूरोपीय संघ समेत कई पश्चिमी देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.
तत्काल जोखिम-प्रबंधन चुनौती
रिपोर्ट में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया गया है कि वह पाकिस्तान की मध्य पूर्व नीति को एक तत्काल जोखिम-प्रबंधन चुनौती के रूप में देखे, ताकि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व में नए प्रॉक्सी संघर्ष और सशस्त्र टकराव को रोका जा सके.
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