Pakistan UAE Loan: ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने की कोशिश की. हालांकि आर्थिक मोर्चे पर खुद तंगहाली से जूझ रहे पाकिस्तान को अब संयुक्त अरब अमीरात ने बड़ा झटका दे दिया है. दुनिया से आर्थिक मदद मांगकर काम चला रहे पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लिया हुआ 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना होगा.
कर्ज चुकाने की अवधि को बार-बार बढ़ाया जा रहा था
यूएई की तरफ से कर्ज चुकाने की अवधि को बार-बार बढ़ाया जा रहा था. हालांकि, शुक्रवार को आई मीडिया रिपोर्ट्स में साफ किया गया है कि यूएई ने पाकिस्तान से इस महीने के अंत तक सारा कर्ज वापस करने के लिए कहा है. मौजूदा समय में पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार (रिजर्व) में 21 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि है. विदेशी मुद्रा भंडार की राशि से पाकिस्तान फिलहाल यूएई को कर्ज चुका सकता है, लेकिन आने वाले महीनों में देश को बाहरी वित्तीय मदद की आवश्यकता पड़ सकती है.
दुनियाभर के देशों के सामने हाथ फैला रहा Pakistan UAE Loan
हालांकि, पाकिस्तान दुनिया के अन्य देशों के सामने हाथ फैलाकर ही अपनी गाड़ी को आगे खींच रहा है. 31 मार्च 2026 तक पाकिस्तान ने आईएमएफ से लगभग 729 करोड़ डॉलर का कर्ज ले रखा है. ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज दिसंबर 2025 की दूसरी तिमाही तक लगभग 138 अरब डॉलर पहुंच गया है. आईएमएफ के अनुसार, पाकिस्तान वर्तमान में आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है. मार्च 2026 के अंत में, आईएमएफ ने पाकिस्तान के लिए लगभग 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त जारी करने पर सहमति जताई.
चीन ने लगभग 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है
चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता है. चीन ने पाकिस्तान को लगभग 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है. इसके अलावा सऊदी अरब ने करीब 9.16 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता और जमा राशि के रूप में मदद दी है. प्रोफिट बाई पाकिस्तान के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान को अप्रैल 2026 में 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी करना है. पाकिस्तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने बताया कि अबू धाबी ने रकम तुरंत वापस करने की मांग की थी. अधिकारी ने कहा, “यह रकम जल्द से जल्द वापस कर दी जाएगी. वित्तीय कारणों से राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता.”
2019 में दिए गए थे फंड
डॉन के अनुसार, ये फंड 2019 में यूएई द्वारा पाकिस्तान के पेमेंट बैलेंस को स्थिर करने में मदद के लिए दिए गए बाहरी फाइनेंसिंग सपोर्ट का हिस्सा थे. अधिकारी ने कहा कि इस फैसले से अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट के जरिए जमा किए गए डिपॉजिट को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है, जिसे 2019 से कई बार रोलओवर किया गया था.
अपने चल रहे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड प्रोग्राम के तहत, पाकिस्तान को रिजर्व लेवल बनाए रखने और बाहरी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए तीन मुख्य पार्टनर—चीन, सऊदी अरब और यूएई—से लगभग 12.5 बिलियन डॉलर का रोलओवर हासिल करने की जरूरत है. इसलिए, यूएई के डिपॉजिट इस व्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा थे.
पाकिस्तान की स्थिति मुश्किल हो सकती है
डॉन ने आर्थिक विश्लेषक के हवाले से बताया कि अगर नए इनफ्लो से फंड वापस नहीं आया तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आईएमएफ प्रोग्राम के तहत पाकिस्तान की स्थिति मुश्किल हो सकती है. दूसरी ओर, वित्तीय मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि वह “स्थिर फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान के बाहरी फ्लो पर लगातार नजर रख रही है और उन्हें मैनेज कर रही है.” इसमें आगे कहा गया, “पाकिस्तान सरकार अपनी सभी बाहरी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.”

