Palm Sunday: ईरान संघर्ष को 30 दिन बीत चुके हैं. हालात संवेदनशील बने हुए हैं. कूटनीतिक कोशिशों के साथ ग्राउंड एक्शन की भी खबरें आ रही हैं. हाल ही में कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने हमलों को धर्म की आड़ ले सही करार दिया था. पाम संडे पर पोप लियो (14वें) ने किसी का भी नाम लिए बगैर सख्त लहजे में इसकी आलोचना की. उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि ईश्वर उन नेताओं की प्रार्थनाओं को अस्वीकार कर देते हैं जो युद्ध शुरू करते हैं और जिनके “हाथ खून से सने होते हैं.”
शांति का रास्ता अपनाए और पीड़ितों के साथ खड़ी हो दुनिया
पोप ने कहा कि कोई भी देश या नेता भगवान के नाम पर युद्ध को सही नहीं ठहरा सकता. उन्होंने अपील की कि दुनिया शांति का रास्ता अपनाए और पीड़ितों के साथ खड़ी हो. पाम संडे ईस्टर से पहले साल के सबसे पवित्र सप्ताह की शुरुआत का प्रतीक है. इसी अवसर पर सेंट पीटर स्क्वायर में हजारों की संख्या में एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. पोप ने कहा कि यीशु का इस्तेमाल किसी भी युद्ध को सही ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता.
अंधाधुंध हवाई हमले करने वालो पर लगाना चाहिए प्रतिबंध
अमेरिका के पहले पोप लियो, ने कड़ी धूप के बीच कहा कि “यही हमारे ईश्वर हैं: यीशु, शांति के राजा, जो युद्ध को अस्वीकार करते हैं, जिनका इस्तेमाल कोई भी युद्ध को सही ठहराने के लिए नहीं कर सकता.” उन्होंने बाइबल के एक अंश का हवाला देते हुए कहा, “यीशु उन लोगों की प्रार्थनाएं नहीं सुनते जो युद्ध छेड़ते हैं, बल्कि उन्हें अस्वीकार कर देते हैं, यह कहते हुए कि ‘भले ही तुम कितनी भी प्रार्थनाएं करो, मैं नहीं सुनूंगा: तुम्हारे हाथ खून से सने हैं.'”
लियो ने किसी भी विश्व नेता का नाम विशेष रूप से नहीं लिया. पोप, जो अपने शब्दों का चयन बहुत सावधानी से करने के लिए जाने जाते हैं, ने इस संघर्ष में तत्काल युद्धविराम की बार-बार अपील की है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि सैन्य हवाई हमले अंधाधुंध होते हैं और उन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.
कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों को सही ठहराने के लिए ईसाई शब्दावली का इस्तेमाल किया है; इन्हीं हमलों से इस बढ़ते हुए युद्ध की शुरुआत हुई थी. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को एक प्रार्थना सभा में उन लोगों के खिलाफ “जबरदस्त हिंसक कार्रवाई” के लिए प्रार्थना करने की बात कही थी, जो उनके अनुसार किसी भी दया के पात्र नहीं हैं.

