ईरान से बढ़ते संघर्ष के बीच US को खरीदनी पड़ रहीं पुरानी मिसाइलें, घटते इंटरसेप्टर के स्टॉक को लेकर ट्रम्प चिंतित

New Delhi: ईरान से बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका को सुरक्षा के मोर्चे पर बडा झटका लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि अमेरिकी सेना को 30 साल से ज्यादा समय बाद फिर से पुरानी लेकिन भरोसेमंद Patriot PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर मिसाइलें खरीदनी पड़ रही हैं. PAC-3 की कमी है. इसे सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि अमेरिका के घटते मिसाइल स्टॉक की बड़ी चेतावनी माना जा रहा है. अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने पुष्टि की है कि उसे अमेरिकी सेना से तीन दशक बाद पहली बार नए PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर बनाने का घरेलू ऑर्डर मिला है.

ईरान के खिलाफ ऑपरेशन

अप्रैल में दिया गया करीब 441.6 मिलियन डॉलर का यह कॉन्ट्रैक्ट ईरान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से जुड़ा है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब CBS News ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका जितनी तेजी से Patriot, THAAD और दूसरी हाई-एंड मिसाइलें इस्तेमाल कर रहा है, उतनी तेजी से उनका उत्पादन नहीं हो पा रहा. अधिकारियों के मुताबिक, मौजूदा रफ्तार लंबे समय तक बनाए रखना संभव नहीं है और इससे अमेरिका की सैन्य तैयारी पर दबाव बढ़ रहा है.

अमेरिका के हथियारों का भंडार मजबूत

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अमेरिका के हथियारों का भंडार मजबूत है और लगातार बढ़ रहा है. लेकिन CBS न्यूज की रिपोर्ट में गुमनाम अधिकारियों ने अलग तस्वीर पेश की है. उनका कहना है कि रक्षा उद्योग इतनी तेजी से नई मिसाइलें नहीं बना पा रहा, जितनी तेजी से वे ईरान और मध्य पूर्व में खर्च हो रही हैं.

सिर्फ ईरान की चुनौती नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के सामने सिर्फ ईरान की चुनौती नहीं है. सैन्य अधिकारियों को यह भी चिंता है कि अगर इसी रफ्तार से हथियार खर्च होते रहे तो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन जैसी संभावित चुनौती से निपटने की तैयारी प्रभावित हो सकती है. अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख एडमिरल सैमुअल पापारो पहले ही अप्रैल में कह चुके हैं कि टॉमहॉक और JASSM जैसी मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने में एक से दो साल लग सकते हैं.

सबसे आधुनिक PAC-3 इंटरसेप्टर

Patriot सिस्टम में आज सबसे आधुनिक PAC-3 इंटरसेप्टर इस्तेमाल होते हैं, लेकिन PAC-2 GEM-T अब भी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में प्रभावी मानी जाती है. मौजूदा Patriot लॉन्चर दोनों तरह की मिसाइलें एक साथ दाग सकते हैं. अमेरिकी सेना कई वर्षों से सिर्फ PAC-3 खरीद रही थी. लेकिन अब 30 साल बाद PAC-2 का नया ऑर्डर इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका उपलब्ध हर विकल्प से अपने मिसाइल भंडार को तेजी से भरना चाहता है.

कीमत भी करीब 20 लाख डॉलर

हैरानी की बात यह है कि एक PAC-2 GEM-T इंटरसेप्टर की कीमत भी करीब 20 लाख डॉलर (19.3 करोड़ रुपये) मानी जाती है, जबकि अत्याधुनिक PAC-3 MSE की कीमत 53 लाख डॉलर प्रति मिसाइल है. यानी हर इंटरसेप्टर करोड़ों रुपये का पड़ रहा है.

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