Islamabad: अपनी साझा सीमा के प्रबंधन के लिए पाकिस्तान और चीन ने एक नया संयुक्त तंत्र शुरू किया है. बुधवार को इस्लामाबाद में सीमा संयुक्त आयोग की पहली बैठक हुई. पाकिस्तान ने इसे सीमा सुरक्षा मजबूत करने और दोनों देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही आसान बनाने की दिशा में अहम कदम बताया. हालांकि, भारत ने इस कथित सीमा संयुक्त आयोग को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का इस निकाय के पास कोई कानूनी आधार नहीं है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह आयोग 2013 में हुए सीमा प्रबंधन संबंधी समझौते के आधार पर बनाया गया है. इसकी पहली बैठक बुधवार को इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय में हुई। पाकिस्तान का कहना है कि यह तंत्र सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोनों देशों के बीच नियमित समन्वय को मजबूत करने में मदद करेगा.
भारत का POK पर कड़ा ऐतराज
भारत ने पाकिस्तान और चीन की ओर से गठित “कथित” सीमा संयुक्त आयोग पर कड़ा विरोध जताया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी भी इंतजाम पर फैसला लेने का अधिकार इस निकाय को नहीं है. भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारतीय क्षेत्र है. नई दिल्ली ने 1963 में पाकिस्तान की ओर से शक्सगाम घाटी का एक हिस्सा चीन को सौंपे जाने को भी अवैध और अस्वीकार्य बताया है.
भारत का CPEC पर भी विरोध
भारत, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC का भी लंबे समय से विरोध करता रहा है. इसका कारण यह है कि इस परियोजना का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है. पाकिस्तान के मुताबिक, नया सीमा तंत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत व्यापार और संपर्क को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा. इस व्यवस्था के जरिए सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देश नियमित तौर पर समन्वय कर सकेंगे.
बैठक के दौरान पाकिस्तान और चीन ने पुलिस प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आदान-प्रदान तथा आधुनिक तकनीक और उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि चीन की कृत्रिम मेधा आधारित तकनीक और आधुनिक उपकरण सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में पाकिस्तान के लिए काफी मददगार हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में चीन के साथ सहयोग को और मजबूत करना चाहता है.
क्या है असली विवाद?
पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा सहयोग का यह नया तंत्र ऐसे समय शुरू हुआ है, जब PoK और शक्सगाम घाटी को लेकर भारत दोनों देशों की गतिविधियों पर लगातार आपत्ति जताता रहा है. इसलिए इस आयोग का गठन केवल सीमा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके संभावित दायरे को लेकर भी भारत ने अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है.