US से तनाव के बीच ईरान का मददगार बना भारत, पिछले 6 महीने से कोच्चि में सुरक्षित है ईरानी नेवी का IRIS लवन शिप

New Delhi: भारत और ईरान की दोस्‍ती की बात सामने आई है. ईरानी नेवी का शिप IRIS लवन पिछले 6 महीने से कोच्चि में है. ईरान नेवी का यह शिप फरवरी में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्‍यू और MILAN-2026 में हिस्‍सा लेने भारत आया था. अमेरिकी नौसेना ने ईरान के IRIS देना फ्रिगेट को श्रीलंका तट के करीब तबाह कर दिया था. उसके बाद से ही IRIS लवन कोच्चि में है. ईरानी नौसेना का लैंडिंग शिप IRIS लवन (IRIS Lavan) अब भी केरल के कोच्चि बंदरगाह पर मौजूद है.

कुछ सदस्य भी कोच्चि में रुके

जहाज के साथ उसके चालक दल के कुछ सदस्य भी कोच्चि में रुके हुए हैं. यह युद्धपोत चार मार्च को मानवीय आधार पर कोच्चि पहुंचा था. लवन और ईरानी नौसेना का फ्रिगेट IRIS देना (IRIS Dena) फरवरी में भारत आए थे. दोनों जहाजों ने विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में हिस्सा लिया था. अभ्यास पूरा होने के बाद दोनों जहाज ईरान लौट रहे थे, तभी पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हो गया.

4 मार्च को कोच्चि में रुकने की अनुमति

इसी दौरान 5 मार्च को ईरानी नौसेना का तीसरा जहाज और फ्लीट सप्लाई वेसल आईआरआईएस बुशहर श्रीलंका में शरण लेने पहुंचा था. IRIS लवन ने भारत पहुंचने से पहले तकनीकी दिक्कतों की सूचना दी थी. इसके बाद भारत ने मानवीय आधार पर उसे 4 मार्च को कोच्चि में रुकने की अनुमति दी. जहाज के चालक दल के सदस्यों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया. मार्च में जब IRIS लवन कोच्चि पहुंचा था, तब उसमें 183 सदस्य सवार थे.

जहाज की देखरेख की जिम्मेदारी

अब भी 50 से अधिक चालक दल के सदस्य कोच्चि में हैं, जबकि कुछ रिपोर्टों में जहाज के संचालन के लिए जरूरी दो दर्जन से अधिक सदस्यों के वहां मौजूद होने की बात कही गई है. सूत्रों ने बताया कि जहाज की देखरेख की जिम्मेदारी अब कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी गई है.

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