Peru School Rules: दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में स्कूलों के लिए प्रस्तावित नए ड्रेस और अनुशासन नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने स्कूलों में व्यवस्था और अनुशासन बहाल करने के उद्देश्य से ऐसे नियम लागू करने की घोषणा की है, जिनमें लड़कियों के नेल पॉलिश, मेकअप, हेयर डाई और छोटे स्कर्ट पहनने पर रोक लगाने का प्रस्ताव शामिल है. वहीं लड़कों को भी छोटे बाल रखने होंगे. सरकार का कहना है कि ये कदम स्कूलों में बुलिंग, यौन उत्पीड़न और हिंसा को रोकने के लिए उठाए जा रहे हैं.
स्कूलों में लागू हो सकते हैं नए प्रतिबंध
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने कहा कि व्यवस्था सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों और कक्षाओं में भी दिखाई देनी चाहिए. इसी उद्देश्य से सरकार ने छात्रों के पहनावे और व्यवहार से जुड़े कई नए नियम प्रस्तावित किए हैं. इन प्रस्तावों के मुताबिक, लड़कों को छोटे बाल रखने होंगे, जबकि लड़कियों को बाल रंगने, मेकअप करने और नेल पॉलिश लगाने की अनुमति नहीं होगी. इसके साथ ही स्कूल यूनिफॉर्म में स्कर्ट की लंबाई को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे.
मोबाइल फोन के उपयोग पर भी लगेगी रोक
इसके अलावा, स्कूल परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर भी सरकार ने सख्ती दिखाई है. प्रस्ताव के अनुसार, शिक्षक की अनुमति के बिना छात्र-छात्राएं स्कूल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसके अलावा गंभीर अनुशासनहीनता के मामलों में छात्रों को स्थायी रूप से स्कूल से निष्कासित करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है.
सरकार ने कहा- बुलिंग और हिंसा रोकने में मिलेगी मदद
राष्ट्रपति फुजीमोरी और शिक्षा मंत्री जोस चांग ने कहा कि ये कदम स्कूलों में बढ़ती हिंसा, बुलिंग, यौन उत्पीड़न और अव्यवस्था को रोकने के लिए आवश्यक हैं. ऐसे में सरकार का दावा है कि अनुशासन आधारित यह मॉडल छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करेगा और स्कूलों में व्यवस्था को मजबूत करेगा.
महिला और मानवाधिकार संगठनों का विरोध
हालांकि सरकार के इस फैसले का मानवाधिकार और महिला संगठनों ने कड़ा विरोध किया है. महिला अधिकार संगठन मनुएला रामोस मूवमेंट और फ्लोरा ट्रिस्टन पेरूवियन वीमेंस सेंटर ने कहा कि बालों की शैली, मेकअप या पहनावे को नियंत्रित करने से यौन हिंसा और स्कूलों में होने वाली अन्य समस्याएं नहीं रुकेंगी. ऐसे प्रतिबंध मूल समस्याओं को हल करने के बजाय छात्रों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसे हैं.
‘लोकलुभावन और सत्तावादी’ फैसला
वहीं, पेरू के नेशनल ह्यूमन राइट्स कोऑर्डिनेटर ने भी इन प्रस्तावित नियमों की आलोचना की है. संगठन ने इन्हें “लोकलुभावन और सत्तावादी” कदम बताते हुए कहा कि अनुशासन के नाम पर व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जाना चाहिए.
फिलहाल, सरकार ने इन प्रस्तावों को अंतिम रूप नहीं दिया है. इन्हें पहले सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा, जहां अभिभावकों, शिक्षकों, छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों की राय ली जाएगी. इसके बाद ही सरकार तय करेगी कि इन नए नियमों को लागू किया जाए या नहीं.