PM मोदी पांच देशों के सफल दौरे के बाद लौटे भारत, ग्रीन एनर्जी और रक्षा क्षेत्र में हुए बड़े समझौते

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों के सफल विदेश दौरे के बाद गुरुवार, 21 मई 2026 को नई दिल्ली लौट आए हैं। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया जिसको भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है.यात्रा के दौरान भारत ने ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, रक्षा, निवेश और टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में कई बड़े समझौते किए.

पीएम 15 मई को पहुंचे संयुक्त अरब

प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले 15 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे, जहां अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका स्वागत किया, दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए “स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क” पर हस्ताक्षर किए, ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में यूएई ने भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के लिए तीन करोड़ बैरल कच्चा तेल उपलब्ध कराने और एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति जताई, इसके अलावा यूएई ने भारतीय बाजारों में पांच अरब डॉलर के निवेश पैकेज की घोषणा की, दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही पर भी जोर दिया.

स्वीडन की दो दिवसीय यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की दो दिवसीय यात्रा में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया, दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने, संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे चरण की शुरुआत करने और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी एवं एआई गलियारे के गठन पर सहमति बनाई, इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन की सरकार और प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए दोनों देशों के बीच मित्रता को और मजबूत बनाने की बात कही।

नॉर्वे यात्रा भी भारत के लिए कई मायनों

भारत के लिए कई मायनों में नॉर्वे यात्रा भी अहम साबित हुई, दोनों देशों ने “ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” की घोषणा की और कुल 12 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, पवन ऊर्जा और कार्बन कैप्चर तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया, इसके अलावा भारत की लंबी तटीय रेखा के विकास, ग्रीन शिपिंग और बंदरगाह अवसंरचना को आधुनिक बनाने के लिए साझा पहल पर सहमति बनी, भारत और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा, जिसके तहत इसरो और नॉर्वे के संबंधित संस्थानों के बीच बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और अनुसंधान को लेकर विशेष समझौता हुआ.

पांच देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव रहा इटली

प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा का अंतिम पड़ाव इटली रहा, यहां उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से विला डोरिया पैम्फिली में मुलाकात की, प्रधानमंत्री मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, दोनों नेताओं ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कनेक्टिविटी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई. इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर भी दोनों नेताओं के बीच विस्तार से चर्चा हुई,

ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर पर सबसे ज्यादा जोर

सरकार का कहना है कि इन समझौतों से भारत की आर्थिक ताकत, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रभाव को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भारत को तेजी से उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है. भारत ने साफ किया कि आने वाले वर्षों में वह ग्रीन एनर्जी और आधुनिक तकनीकों पर सबसे ज्यादा फोकस करेगा. इस दौरे में ग्रीन एनर्जी सबसे बड़ा मुद्दा रहा. भारत ने क्लीन एनर्जी, सोलर पावर और नई ऊर्जा तकनीकों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई अहम समझौते किए इसके अलावा सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर भी बड़ी प्रगति देखने को मिली. भारत लंबे समय से चिप निर्माण के क्षेत्र में खुद को मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा है और इस यात्रा के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी पर चर्चा हुई और कई देशों ने भारत में निवेश बढ़ाने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में रुचि दिखाई है.

UAE के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा समझौता

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर हुआ समझौता माना जा रहा है. भारत और United Arab Emirates के बीच स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और LPG सप्लाई को लेकर अहम सहमति बनी. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में वैश्विक तनाव या युद्ध जैसी परिस्थितियों में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिलता है. इस समझौते के बाद भारत भविष्य में तेल संकट की स्थिति से बेहतर तरीके से निपट सकेगा। बताया जा रहा है कि UAE भारत के रणनीतिक तेल भंडार को और मजबूत करने साथ ही लंबी अवधि तक गैस सप्लाई सुनिश्चित करने में सहयोग करेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा फायदा मिलेगा.

रक्षा क्षेत्र में भी हुए अहम समझौते

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में रक्षा क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी गई. भारत ने आधुनिक रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन और सुरक्षा सहयोग को लेकर कई देशों के साथ बातचीत की. इन समझौतों से भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है. साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा, सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे प्रभावशाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है और यह दौरा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है.

इस दौरे से भारत को क्या बड़े फायदे होंगे ?

इस दौरे के बाद भारत को कई क्षेत्रों में फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है —

  • ऊर्जा संकट के समय तेल और LPG सप्लाई सुरक्षित रहेगी
  • AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में नई तकनीक और निवेश आएगा
  • रक्षा उत्पादन और सैन्य तकनीक को मजबूती मिलेगी
  • विदेशी निवेश और व्यापार सहयोग बढ़ेगा
  • वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और प्रभाव मजबूत होगा
  • भारत की वैश्विक ताकत का बड़ा संकेत

प्रधानमंत्री मोदी का यह पांच देशों का दौरा केवल एक सामान्य विदेश यात्रा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और रणनीतिक प्रभाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

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