PoK Constitutional Status: भारत ने 2019 में संविधान संशोधन कर कश्मीर से धारा 370 हटा दिया था. अब पाकिस्तान भी कुछ ऐसा ही करने के बारे में सोच रहा है. दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्थिति को लेकर इस्लामाबाद में बड़े बदलाव पर सोज विचार किया जा रहा है. पाकिस्तान सरकार के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, दोनों इलाकों को अंतरिम तौर पर राज्य जैसी संवैधानिक पहचान देने पर बात चल रही है. यह बदलाव बहुचर्चित 28वें संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है या इसके लिए अलग कानून भी लाया जा सकता है.
भारत के नक्शे कदम पर चल रहा पाकिस्तान, PoK पर आर्टिकल 370 जैसा दांव चलाने पर कर रहा विचार
PoK Constitutional Status
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दरअसल ये इलाके भले पाकिस्तान के नियंत्रण में हैं, लेकिन संविधान में उन्हें पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, केपी की तरह नहीं गिना जाता. इसलिए ये इलाके पूरे देश से अलग चलते हैं. इस दौरान सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान की नजर केवल अपने अंदरूनी संवैधानिक समीकरण पर नहीं है. इस्लामाबाद भारत और चीन के बीच चल रही बॉर्डर से जुड़ी बातचीत और दोनों देशों के रिश्तों में सुधार को भी बेहद करीब से देख रहा है.
बता दें कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 1(2) में उन इलाकों का जिक्र है, जिन्हें देश का हिस्सा माना जाता है. सूत्रों के मुताबिक, अब इस प्रावधान में बदलाव की संभावना पर भी चर्चा हो रही है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अनुच्छेद 1(2) में सीधे संशोधन किया जाएगा या 28वें संविधान संशोधन के जरिए यह बदलाव किया जाएगा. फिलहाल जिस प्रस्ताव पर विचार हो रहा है, उसके तहत PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को अंतरिम संवैधानिक दर्जा दिया जा सकता है, जो काफी हद तक पाकिस्तान के राज्यों जैसा होगा. इसके साथ ही, पाकिस्तान कश्मीर विवाद पर अपने मौजूदा आधिकारिक रुख को भी बरकरार रख सकता है.
दरअसल, पाकिस्तान के इस मंथन के पीछे भारत और चीन के बीच चल रही बॉर्डर की बातचीत है. भारत और चीन लंबे समय से अपने सीमा विवाद को सुलझाने और रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. पाकिस्तान इस प्रक्रिया को इसलिए गंभीरता से देख रहा है क्योंकि जम्मू-कश्मीर का व्यापक क्षेत्रीय विवाद भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों से जुड़ा हुआ है.
बता दें कि चीन के नियंत्रण में अक्साई चिन है, जबकि पाकिस्तान PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है. इसके अलावा साल 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी थी, जिसे भारत ने नहीं माना है. ऐसे में यदि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर कोई बड़ा समझौता होता है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र के मौजूदा क्षेत्रीय समीकरणों पर पड़ सकता है. इसी संभावना को देखते हुए इस्लामाबाद अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की संवैधानिक स्थिति पर नए सिरे से विचार कर रहा है.

