New Delhi: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले 50 दिनों से जारी धरना- प्रदर्शन में अब तक 109 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. स्थानीय नागरिक संगठनों और चश्मदीदों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा फायरिंग और बल प्रयोग किया गया. अब इस जनआंदोलन ने भीषण रूप ले लिया है. मौजूदा समय में रावलाकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद समेत विभिन्न इलाकों से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन चल रहे हैं. इस दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई भी जारी है.
शवों के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और सुरक्षा बलों पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और शवों के प्रबंधन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. घटनास्थल से आ रही रिपोर्टों और परिजनों का दावा है कि भारी बल तैनात कर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सीधी कार्रवाई की जा रही है. अपनों को खो चुके परिवारों का आरोप है कि उन्हें धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
कार्रवाई के दौरान संवेदनाओं को नजरअंदाज
दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा बल रात के अंधेरे में शवों को अपने कब्जे में लेकर परिजनों की सहमति के बिना दफना रहे हैं. कई स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान बुनियादी मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है. PoK के निवासी पिछले लगभग दो महीनों से अपने बुनियादी अधिकारों और राहत उपायों को लेकर सड़कों पर हैं.
स्थानीय नागरिकों का नियंत्रण
उनकी मुख्य मांगें हैं- बिजली और पानी के बिलों पर सब्सिडी. आटा, राशन और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती महंगाई से राहत, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय नागरिकों का नियंत्रण. शुरुआत में यह आंदोलन शांतिपूर्ण था लेकिन मांगें पूरी न होने और स्थानीय प्रशासन द्वारा अपनाए गए सख्त रवैये के बाद यह पूरे क्षेत्र में फैल गया. पिछले कुछ दिनों में हालात अधिक बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में व्यापक नाकेबंदी कर दी है.
इंटरनेट सेवाएं और मोबाइल नेटवर्क बाधित
क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं और मोबाइल नेटवर्क बाधित कर दिए गए हैं ताकि अंदरूनी हालात के अपडेट बाहर न आ सकें. कई जगहों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के सीधा बल प्रयोग किया गया. इसके अलावा घरों में तलाशी अभियान और युवाओं की धरपकड़ की खबरें भी सामने आई हैं. फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस पूरे घटनाक्रम पर तुरंत हस्तक्षेप करने और हिंसा रोकने की अपील की जा रही है.
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