ईरान-अमेरिका युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत में पाकिस्तान का कटा टिकट, कतर की एंट्री से बदला पूरा समीकरण  

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran US Tension Qatar: ईरान-अमेरिका युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत के बीच बड़ा ट्विस्ट सामने आया है. दरअसल, अब तक पाकिस्तान और उसके आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को इस बैकचैनल डिप्लोमेसी का बड़ा चेहरा बताया जा रहा था, लेकिन अब कतर की एंट्री ने पूरा समीकरण ही बदल दिया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कतर की एक नेगोशिएशन टीम शुक्रवार को तेहरान पहुंची, जो अमेरिका के साथ समन्वय में ईरान से बातचीत कर रही है. इसका मकसद युद्ध खत्म कराने और बाकी अटके मुद्दों पर अंतिम डील की कोशिश करना बताया गया है. यानी जिस बातचीत में पाकिस्तान खुद को सबसे बड़ा तुर्रम खां बन रहा था, वहां अब ट्रंप प्रशासन ने कतर पर भी भरोसा दिखाकर नया चैनल खोल दिया है.

इसमे सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान अब तक कोई डील नहीं करा पाया है और यह दिखाता है कि अमेरिका खाड़ी के दूसरे पक्षों की भी मदद ले रहा है. वहीं, दिलचस्प बात यह है कि आसिम मुनीर खुद भी तेहरान पहुंचे हैं, लेकिन उसी समय कतर की टीम का पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका केवल पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना चाहता.

ट्रंप ने खोला बैकअप चैनल

बता दें कि अब तक पाकिस्तान को इस बातचीत का इकलौता मध्यस्थ बताया जा रहा था, लेकिन कतर की सीधी एंट्री से यह संकेत मिल रहा है कि ट्रंप ने बैकअप चैनल भी खोल दिया है. यानी यदि पाकिस्तान के जरिए डील आगे नहीं बढ़ती, तो कतर जैसे पुराने और भरोसेमंद अमेरिकी सहयोगी को मैदान में उतारा जा सकता है.

बातचीत में क्यों अहम है कतर की एंट्री?

दरअसल, कतर पहले भी गाजा युद्ध, अफगानिस्तान और कई पश्चिम एशियाई संकटों में बैकचैनल मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है. कतर अमेरिका का मेजर नॉन नाटो एलाई है और उसके यहां अल उदैद एयर बेस मौजूद है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है. हालांकि इस युद्ध में ईरान ने कतर पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिससे उसकी LNG सप्लाई को बड़ा नुकसान हुआ था. इसके बावजूद अब फिर से कतर बातचीत की मेज पर लौट आया है.

पाकिस्तान क्या कह रहा है?

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियोे कि पाकिस्तान ने अब तक ‘अच्छा काम’ किया है, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि खाड़ी देशों के भी अपने हित हैं और अमेरिका सभी से बात कर रहा है. यानी बयान भले संतुलित रहा, लेकिन मैदान में कतर की एंट्री ने संकेत दे दिया कि पाकिस्तान अकेला गेम नहीं चला रहा.

होर्मुज भी बना बड़ा अड़ंगा

बातचीत में सबसे बड़ा पेच सिर्फ परमाणु कार्यक्रम नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री रास्ता पूरी तरह खुले, जबकि ईरान इसे अपनी रणनीतिक ताकत की तरह इस्तेमाल कर रहा है. मार्को रुबियो ने यहां तक कहा कि अगर ईरान रास्ता नहीं खोलता तो अमेरिका को ‘Plan B’ भी तैयार रखना होगा.

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