ट्रंप-पुतिन के झगड़े का रूस की तेल कंपनी पर बड़ा असर, कुआं और रिफानरी बेचने को हुई मजबूर

RUSSIA : काफी लंबे समय से चल रही अमेरिका और रूस के बीच रार थमने का नाम नहीं ले रही है और अब इसका असर भी दिखने लगा है. सबसे अहम बात यह है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झगड़े का नुकसान तेल कंपनियों को हो रहा है. इस मामले को लेकर रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी लुकोइल का कहना है कि वह अपनी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को बेचेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, लुकोइल ने कहा कि ”परिसंत्तियों को OFAC विंड डाउन लाइसेंस के तहत बेचा जा रहा है. इसके साथ ही उन्‍होंने ये भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी अपनी अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों को बिना किसी रुकावट के संचालित करने के लिए लाइसेंस के आवेदन के विस्तार पर विचार कर सकती है.”

ट्रंप ने रूस की ऑयल कंपनियों को किया था बैन

जानकारी देते हुए बता दें कि लुकोइल रूस की दूसरी सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी है. जिस पर अमेरिका ने फरवरी 2022 से शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद कई प्रतिबंध लगा दिए. ऐसे में अमेरिका के इस फैसले से तेल कंपनियों को काफी घाटा हो रहा है. इसी कारण से लुकोइल ने यह कदम उठाया है. बता दें कि ट्रंप ने लुकोइल और रोसनेफ्ट को बैन कर दिया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार ये दोनों कंपनियां रूस के 50 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन करती हैं.

अमेरिका के बाद ब्रिटेन ने भी लिया एक्शन

इतना ही नही बल्कि अमेरिका के बाद ब्रिटेन ने भी लुकोइल और रोसनेफ्ट के खिलाफ एक्शन ले लिया. बता दें कि ब्रिटेन ने 15 अक्टूबर को 44 शैडो टैंकरों को बैन कर दिया था. इस मामले को लेकर ब्रिटेन ने कहा कि कच्चे तेल से रूस को हो रही कमाई को कम करना के लिए यह कदम उठाया गया है. इसके साथ ही बैन लगाते हुए अमेरिका ने भी यही बात कही थी. अगर लुकोइल की विदेशी संपत्ति की बात की जाए तो उसके पास इराक में तेल का कुआं है. यह दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में से एक है.

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