बड़ा दावा: US से युद्ध के बीच ईरान की मदद कर रहा रूस, अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दे रहा खुफिया जानकारियां

New Delhi: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और ईरान के सैन्य संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच रूस की भूमिका को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान को इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, सैटेलाइट निगरानी और सिग्नल इंटेलिजेंस उपलब्ध करा रहा है, जिससे तेहरान अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. हाल के अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद रूस ने सार्वजनिक रूप से ईरान का समर्थन भी किया है.

सैन्य गतिविधियों की बेहतर निगरानी

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस खुफिया जानकारी की मदद से ईरान अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की बेहतर निगरानी कर सकता है. इससे उसकी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने, महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने और ड्रोन व मिसाइल हमलों की सटीकता में सुधार करने में मदद मिल सकती है. बताया गया है कि रूस की ओर से साझा की जा रही जानकारी में सैटेलाइट निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस शामिल है.

संचालन को प्रभावित करने की क्षमता

इससे ईरान अमेरिकी विमानों और सैन्य अभियानों की पहचान करने के साथ-साथ कुछ अमेरिकी हथियार प्रणालियों के संचालन को प्रभावित करने की क्षमता भी विकसित कर सकता है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कुछ अधिकारियों ने यह जानकारी साझा की है कि मॉस्को और तेहरान के बीच खुफिया सहयोग बढ़ा है. इससे पहले भी ऐसी खबरें आई थीं कि रूस ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी ईरान के साथ साझा की थी. रूस और ईरान ने इन रिपोर्टों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

खुफिया साझेदारी की सार्वजनिक पुष्टि नहीं

दोनों देशों ने इस तरह की किसी भी खुफिया साझेदारी की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम रूस और ईरान के बीच तेजी से मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों का हिस्सा है. इसी वर्ष जनवरी में दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि इसमें आपसी सैन्य रक्षा का प्रावधान शामिल नहीं था.

सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए

पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान ने रूस को ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया गया. हालांकि रूस और ईरान दोनों इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं. ऐसे में यदि खुफिया सहयोग की ये रिपोर्टें सही साबित होती हैं, तो पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन और अमेरिका-ईरान तनाव पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

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